तिरुवनंतपुरम, 11 अगस्त (भाषा) देश के पहले ट्रांसजेंडर पायलट एडम हैरी ने घर और समाज में अपनी लैंगिक पहचान को लेकर काफी ‘उत्पीड़न’ का सामना किया लेकिन उन्होंने विमान उड़ाने के अपने लंबे समय से पल रहे ख्वाब को मरने नहीं दिया।
हैरी ने वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले ट्रांसजेंडर लोगों की फिटनेट के आंकलन पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नए दिशा-निर्देशों का स्वागत किया है।
विमानन नियामक डीजीसीए ट्रांसजेंडर के लिए अपना पहला चिकित्सा दिशा निर्देश तैयार कर रहा है। इसके लिए अकेले अपने दम पर लंबी लड़ाई लड़ने वाले हैरी को लगता है कि जो अपमान और दुख उन्होंने हमेशा सहा, उसने उन्हें अधिक मजबूत बनाया और अपने सपने पूरे करने की ललक पैदा की।
केरल के 23 वर्षीय हैरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह डीजीसीए के फैसले को लेकर ‘‘बहुत खुश’’ हैं और यह भारत में तीसरे लिंग के समुदाय के लिए ‘‘मील का पत्थर’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अकेले मेरी जीत नहीं है बल्कि पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय की जीत है, जिन्हें अन्य लिंग के लोगों जितना सक्षम होने के बावजूद अपनी लैंगिक पहचान के लिए प्रताड़ित किया जाता है।’’
डीजीसीए ने वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले ट्रांसजेंडर लोगों की फिटनेस का आकलन करने के लिए चिकित्सा परीक्षकों के वास्ते बुधवार को दिशा निर्देश जारी किए।
उसने पिछले महीने मीडिया में आयी उन खबरों का खंडन किया था कि हैरी को वाणिज्यिक पायलट का लाइसेंस देने से इनकार कर दिया गया है।
इन खबरों को सही नहीं बताते हुए डीजीसीए ने तब कहा था कि एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को एक फिटनेस चिकित्सा प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है, बशर्ते कि उन्हें ‘‘किसी तरह की चिकित्सकीय, मनोरोग या मनोवैज्ञानिक बीमारी न हो।’’
डीजीसीए ने बुधवार को अपने दिशानिर्देशों में कहा कि एक ट्रांसजेंडर आवेदक की फिटनेस का आकलन उनकी कार्यात्मक क्षमता और अक्षमता के जोखिम का आकलन करने के सिद्धांतों का पालन करते हुए किया जाएगा।
इसमें यह उल्लेख किया गया है कि ऐसे ट्रांसजेंडर आवेदक, जो पिछले पांच वर्षों से हार्मोन थेरेपी ले रहे हैं या लिंग परिवर्तन सर्जरी करा चुके हैं, उनकी मानसिक सेहत की स्थिति जांची जाएगी।
भाषा
गोला मनीषा
मनीषा
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