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Tuesday, 28 April, 2026
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किन्नर समुदाय के पास ‘बधाई’ मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं :उच्च न्यायालय

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लखनऊ, 28 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को अपने एक अहम निर्णय में कहा कि ‘किन्नर’ समुदाय के सदस्यों के पास मांगलिक अवसरों पर ‘बधाई’ या ‘नेग’ मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

अदालत ने कहा कि इस तरह की वसूली भारतीय न्याय संहिता के तहत एक अपराध मानी जा सकती है।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय ने यह आदेश गोंडा जिले की रहने वाली एक किन्नर रेखा देवी द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए दिया।

रेखा देवी ने ‘नेग’ वसूलने के लिए एक खास इलाके को अपने लिए आरक्षित करने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता ने जरवल कस्बे में ‘काटी का पुल’ से लेकर ‘घाघरा घाट’ और कर्नलगंज में ‘सरयू पुल’ तक के इलाके को अपने लिए खास तौर पर आरक्षित करने की मांग की थी। उसका दावा था कि वह कई सालों से इस इलाके में ‘बधाई’ वसूलती आ रही है।

रेखा देवी के वकील ने दलील दी कि जब समुदाय के दूसरे लोग भी इसी इलाके में आते हैं तो अक्सर झगड़े होते हैं।

वकील ने यह भी कहा कि किन्नरों का मांगलिक अवसरों पर ‘नेग’ मांगना लंबे समय से चली आ रही प्रथा है, इसलिए इसे एक ‘रीति-रिवाज से मिला अधिकार’ माना जाना चाहिए।

अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी कर या शुल्क केवल कानून के अधिकार के तहत ही वसूली जा सकता है और ‘बधाई’ या ‘जजमानी’ के नाम पर धन वसूलने की प्रथा को कानून की कोई मान्यता प्राप्त नहीं है।

पीठ ने कहा, ”किसी भी व्यक्ति से उसकी मर्जी से या उसके खिलाफ धन वसूलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। किसी भी नागरिक को केवल वही रकम चुकाने का निर्देश दिया जा सकता है, जिसे कानून द्वारा वैध रूप से अधिकृत किया गया हो।”

अदालत ने यह भी कहा कि ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019’ में इस तरह के किसी भी अधिकार का कोई प्रावधान नहीं है।

पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की मांग को स्वीकार करने का मतलब होगा कि हम अवैध वसूली को कानूनी मान्यता दे रहे हैं, जिससे आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

पीठ ने यह भी कहा कि इस तरह की वसूली को कानून द्वारा कभी भी मान्यता नहीं दी गई है, और ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडात्मक प्रावधान लागू हो सकते हैं।

भाषा सं. सलीम शोभना

शोभना

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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