नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) ने शुक्रवार को दावा किया कि एआई शिखर सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन के बाद उसके सदस्यों को ‘‘उत्पीड़न’’ का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस की युवा शाखा ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किसानों के हितों को नुकसान और अमेरिकी हितों को फायदा पहुंचाएगा।
आईवाईसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संगठन ने विरोध समझौते को लेकर चिंताओं को उजागर करने के उद्देश्य से किया था। उन्होंने इस समझौते को ‘‘देश के लोगों, विशेष रूप से किसानों के लिए नुकसानदायक’’ बताया।
एक बयान के अनुसार चिब ने कहा, ‘‘यह सर्वविदित है कि हमने एआई शिखर सम्मेलन के दौरान विरोध प्रदर्शन किया था। इसका एकमात्र उद्देश्य यह उजागर करना था कि सरकार ने किस प्रकार समझौतावादी तरीके से यह व्यापार समझौता किया।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से कृषि क्षेत्र और कपड़ा उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, साथ ही डाटा सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
चिब ने कहा, ‘‘देश का डाटा, जो हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है, संभावित रूप से अमेरिका को मुफ्त में हस्तांतरित किया जा सकता है। इससे नागरिकों को नुकसान होगा और प्रमुख क्षेत्रों को क्षति पहुंचेगी।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के बाद युवा कांग्रेस के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया और उन पर दबाव डाला गया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे कई कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया और उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। हालांकि, अब उन सभी को जमानत मिल चुकी है।’’
विरोध प्रदर्शन के संबंध में आईवाईसी के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा को दी गई अग्रिम जमानत का जिक्र करते हुए चिब ने कहा कि इससे कानूनी व्यवस्था में उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।
शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन को ‘‘अपराध की तरह पेश किया जा रहा है” और प्राथमिकी में प्रदर्शन की वास्तविक प्रकृति को सही तरीके से दर्शाया नहीं गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, नारे लगा रहे थे, फिर भी उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई।’’
उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ताओं के परिवारों को परेशान किया गया और उनके घरों पर छापे मारे गए।
शर्मा ने कहा, ‘‘विरोध करने का अधिकार मौलिक है। हम इस एकतरफा समझौते के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।’’
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप
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