(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सहिष्णुता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान के महत्व को समझना जरूरी है।
नयी दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में एक अंतरधार्मिक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म लोगों के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक विश्वास और प्रथाएं हमें विपरीत परिस्थितियों में राहत, आशा और शक्ति प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रार्थना और ध्यान मनुष्यों को आंतरिक शांति और भावनात्मक स्थिरता का अनुभव प्रदान करने में मदद करते हैं। साथ यह भी कहा कि शांति, प्रेम, पवित्रता और सत्य जैसे मौलिक आध्यात्मिक मूल्य ‘‘ हमारे जीवन को सार्थक बनाते हैं।’’
राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक बयान में राष्ट्रपति के हवाले से कहा गया, ‘‘इन मूल्यों से रहित धार्मिक प्रथाएं हमें लाभान्वित नहीं कर सकतीं। समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सहिष्णुता, परस्पर सम्मान और सद्भाव के महत्व को समझना आवश्यक है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक मानव स्नेह और सम्मान का हकदार है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब विभिन्न धर्मों के लोग सद्भाव से एक साथ रहते हैं, तो समाज और देश का सामाजिक ताना-बाना सुदृढ़ होता है। यही ताकत देश की एकता को मजबूत करती है और प्रगति के पथ पर ले जाती है।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘हमारा लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है’’। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक होगा।
भाषा खारी पवनेश
पवनेश
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