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Monday, 22 July, 2024
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लुधियाना के इस MLA पर रेप और हत्या के प्रयास के मामले दर्ज लेकिन लोगों के बीच ‘रॉबिन हुड’ की छवि

लोक इंसाफ पार्टी के सह-संस्थापक और दो बार आत्मनगर के विधायक रह चुके सिमरजीत बेन्स का मुकाबला अपने बचपन के दोस्त से है. आरोप है कि पेशे से वकील इस दोस्त की हत्या का प्रयास भी उन्होंने किया और वही इनके खिलाफ बलात्कार का मुकदमा भी लड़ रहा है.

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लुधियानाः पंजाब के लुधियाना शहर का चप्पा-चप्पा ‘बड़े बेन्स’ और ‘छोटे बेन्स’ के पोस्टरों से भरा हुआ है. इनका चुनाव चिन्ह लेटरबॉक्स है.

बलविंदर और सिमरजीत सिंह बेन्स, दोनों भाई वर्तमान विधायक हैं और शहर में काफी प्रभाव रखते हैं. यह शहर होजरी उद्योग और साईकिल उत्पादन के लिए दशकों से मशहूर रहा है. दोनों भाइयों ने मिलकर 2016 में लोक इंसाफ पार्टी (एलआईपी) का गठन किया था. बलविंदर या ‘बड़े बेन्स’ लुधियाना दक्षिण के विधायक हैं और चर्चा में कम रहते हैं. वहीं, आत्म नगर से लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रहे सिमरजीत या ‘छोटे बेन्स’ को चर्चा में रहना पसंद है.

उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिसमें कोविड प्रोटोकॉल से लेकर मारपीट और चोरी, आपराधिक हफ्ता वसूली से लेकर हत्या के प्रयास और बलात्कार के संगीन मामले शामिल हैं. लेकिन, सिमरजीत और उनके समर्थकों पर इसका कोई असर नहीं दिखता.

दिप्रिंट से बातचीत के दौरान सिमरजीत ने कहा, ‘मेरे खिलाफ 17 मुकदमें दर्ज हैं. हर बार चुनाव आते ही मेरे ऊपर मुकदमा डाल दिया जाता है. अगर मैंने अपराध किए होते तो, मैं भयभीत रहता. लेकिन, मुझे किसी तरह भय नहीं है.’

इस बार सिमरजीत बेन्स के ऊपर लुधियाना की एक महिला (44 साल) ने बलात्कार का मामला दर्ज किया है. महिला का आरोप है कि सिमरजीत ने उसके साथ 12 बार बलात्कार किया था. महिला के वकील हरीश धांडा इसी आत्मनगर सीट से शिरोमणि अकाली दल (सैड) की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. सिमरजीत के ऊपर उसके बचपन के दोस्त और अब कांग्रेस की टिकट पर वहीं से चुनाव लड़ रहे कमजीत करवाल की हत्या के प्रयास का भी मामला दर्ज है.

‘गुंडा’ या ‘रॉबिनहुड’?

सिमरजीत बेन्स को उसके समर्थक गरीबों का रॉबिन हुड कहते हैं. वहीं, उसके विरोधी उसे गुंडा मानते हैं.

रॉबिन हुड के तौर पर वह अपनी विधान सभा सीट पर सुविधा सेंटर चलाने के लिए मशहूर हैं. यहां पर लोगों के पेंशन के कागज, स्कॉलरशिप, मजदूरों के वेतन, बिजली के बिल और महापालिका के काम बिना घूस दिए पूरे करवाए जाते हैं.

सिमरजीत बेन्स के खिलाफ हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे गंभीर मामले भी दर्ज हैं. बलात्कार मामले में, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जेल जाने से राहत प्रदान की थी. सिमरजीत को पिछले हफ्ते कांग्रेस प्रत्याशी के हत्या के प्रयास में हिरासत में लिया गया था. लेकिन वे जल्द ही छूटने में कामयाब रहे.

नवंबर 2020 में बेन्स के इलाके में रहने वाली एक महिला ने इस सत्तारूढ़ विधायक पर 12 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था. दिप्रिंट से बातचीत के दौरान पीड़ित महिला ने बताया कि वह संपत्ति के मामले में सिमरजीत से मिलने 2020 की शुरुआत में गई थी. संपत्ति की बिक्री को लेकर कुछ बैंक कर्मी उसे परेशान कर रहे थे. महिला के पति का निधन 2018 में हो चुका है.

महिला का आरोप है कि ‘उसने मौके का फायदा उठाते हुए 12 बार उसके साथ बलात्कार किया. तीन बार अपने पड़ोसी के घर में और बाकी समय अपने ऑफिस में.’

पिछले एक साल से ज्यादा समय से वह लुधियाना के पुलिस कमिश्नर के ऑफिस के सामने सुबह 9 बजे से शाम 3 बजे तक धरने पर बैठ रही है. उसके हाथ में तख्ती होती है. जिसमें सिमरजीत को बलात्कारी बताया गया है.

महिला का आरोप है कि उसे सिमरजीत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में एक साल का समय लग गया. मामले को अगस्त 2021 में दाखिल किया गया था. ‘मामले को खारिज करने के भी तमाम कोशिशें की गईं.’

पीड़िता ने बताया कि उसे धमकियां मिल रही हैं. न सिर्फ उसे बल्कि उसके पिता और बेटे के खिलाफ भी दूसरे राज्यों में झूठे मामले दर्ज कराए गए हैं.’

महिला और उसके वकील हरीश धांडा कहते हैं, ‘सिमरजीत को पंजाब पुलिस इसलिए बचा रही है, क्योंकि उसके घनिष्ठ संबंध कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु और सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के साथ हैं.’

सिमरजीत और उसके समर्थक बलात्कार मामले या हत्या और लूटपाट के मामले में सवालों का जवाब देने से नहीं घबराते हैं. सिमरजीत कहते हैं, ‘उसका काम लोगों की मदद करना है, वह अपने विरोधियों के काम कराने से भी पीछे नहीं हटता.’

वह चेतावनी देते हुए कहते हैं, ‘मैं गुंडागर्दी नहीं बर्दाश्त कर सकता. हम भगत सिंह के खानदान से हैं. हम महात्मा गांधी की इज्जत करते हैं लेकिन हमारा दिमाग भगत सिंह वाला है. हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.’

सैड पार्टी के उम्मीदवार और वकील धंडा का कहते हैं, ‘सिमरजीत समाज के लिए एक कैंसर जैसा है, जिसका इलाज जरूरी है. मुझे बलात्कार की पीड़िता की मदद करने के लिए प्रताड़ित किया गया और तमाम गालियां दी गईं.’

धंडा कहते हैं, ‘बेन्स ने अपना साम्राज्य बिजली की चोरी करके खड़ा किया है. वह रॉबिन हुड बनने का नाटक करते हैं लेकिन असल में वह गुंडे हैं. सुविधा सेंटर का उपयोग नकली पहचान पत्र बनाकर फर्जी वोट डलवाने के लिए किया जाता है.’


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‘मौका देखकर नरम और गरम’

सिमरजीत ने 1994 में 24 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया और महापालिका का पार्षद बना. निर्दलीय उम्मीदवार से अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले सिमरजीत अब तक कई पार्टियां बदल चुके हैं.

वे शिरोमणि अकाली दल का भी हिस्सा रहे. लेकिन, बाद में उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी. सिमरजीत की पार्टी एलआईपी, बसपा, सीपीआई और आम आदमी पार्टी से भी गठबंधन कर चुकी है.

एलआईपी, आम आदमी पार्टी से 2018 में अलग हो गई थी. ऐसा तब हुआ, जब आप के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने पूर्व राज्य मंत्री और सैड नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से ड्रग व्यवसाय के आरोपों को लेकर माफी मांग ली.

एलआईपी का गठन सिमरजीत ने उस समय किया था जब उसने बालू माफिया और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए टीम इंसाफ प्रोजेक्ट शुरू किया था.

सिमरजीत के पुराने सहयोगी और पूर्व एलआईपी पार्षद गुरूप्रीत सिंह खुराना कहते हैं, ‘वह सभ्य लोगों के लिए नरम रहते हैं और जब गलत आदमियों की बात आती है तब गरम हो जाते हैं.’

एलआईपी के ही गुरूमीत पाल सिंह ने कहा, ‘मैंने सिमरजीत से ईमानदार और मेहनती होने के गुण सीखे.’

पार्टी के अन्य सह-संस्थापक जगजीत सिंह सोनिक कहते हैं, ‘सिमरजीत ने मुझे सिखाया कि आम लोगों का काम कैसे किया जाता है.’

सोनिक कहते हैं, ‘अपनी तनख्वाह के अलावा बेन्स जी सुविधा सेंटर में हर महीने 2 से 3 लाख रुपये की मदद करते हैं.’

बहुत लोगों का मानना है कि एलआईपी को कांग्रेस और बीजेपी ने अपने साथ लेने से इसलिए इंकार कर दिया, क्योंकि सिमरजीत के खिलाफ कई संगीन मामले दर्ज हैं.


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जीत के लिए तैयार

सिमरजीत गर्व से बताते हैं, ‘किसानों के कानून का विरोध करने वाले वह पहले आदमी थे. उन्होंने एक साल तक चले दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया था.’

वह कहते हैं, ‘मैंने प्रस्तावित किसान बिल के विरोध में अमृतसर के जलियांवाला बाग से लेकर चंडीगढ़ के सीएम आवास तक साईकिल यात्रा की थी. मेरे ऊपर यात्रा के समय कोविड नियमों के उल्लंघन करने का आरोप लगा था, लेकिन मैंने 10,000 पंपलेट बांटे थे.’

वह कहते हैं, ‘मैंने इस बात को कई बार दोहराया है कि अगर ये कृषि कानून पारित हो जाते हैं, तब कॉरपोरेट घराने पंजाब की जमीनों पर कब्जा कर लेंगे.’

इतने सारे आरोपों के बावजूद सिमरजीत को विश्वास है कि वे आत्मनगर से तीसरी बार विधायक बनेंगे.

वह कहते हैं, ‘वह भ्रष्टाचार और लूट माफिया’ के खिलाफ लड़ने पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे. उन्हें विश्वास है कि उनकी पार्टी चुनावों में विजयी होगी.

सिमरजीत कहते हैं, ‘चुनाव के बाद किस पार्टी के साथ उनका गठबंधन होगा यह चुनाव के नतीजे आने के बाद देखी जाएगी. कौन जानता है कि हमें गठबंधन करने की जरूरत ही न पड़े.’

सुकृति वत्स के इन्पुट्स

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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