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Saturday, 31 January, 2026
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‘यह कश्मीर नहीं है’: उत्तराखंड में नाबालिग शॉल बेचने वाले पर सांप्रदायिक हमला, लोहे की रॉड से वार

बुधवार को देहरादून के विकासनगर इलाके में दो भाइयों पर हमला होने के बाद खतरे की घंटी बज गई है, क्योंकि उन्होंने एक दुकानदार को अपनी कश्मीरी मुस्लिम पहचान बताई थी.

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नई दिल्ली: “यह कश्मीर नहीं है, यह उत्तराखंड है”—एक किराना दुकानदार ने सांप्रदायिक बहस के दौरान अपनी दुकान पर आए कश्मीरी मुस्लिम शॉल विक्रेताओं से यह कहा था. बहस बढ़ते ही दुकानदार ने 17 वर्षीय ताबिश अहमद को पकड़ लिया और उसे पीटना शुरू कर दिया.

जब उसके बड़े भाई मोहम्मद दानिश (20) ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो हमलावर ने उस पर भी हमला कर दिया. ताबिश अपने भाई को बचाने आगे बढ़ा, लेकिन तभी लोहे की रॉड लिए एक अन्य व्यक्ति ने पीछे से ताबिश के सिर पर वार कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया.

“ताबिश के सिर पर लोहे की रॉड से 10-12 बार मारा गया. उसका कंधा टूट गया और वह गिर पड़ा,” दोनों लड़कों के चचेरे भाई बशीर अहमद ने इस हफ्ते की शुरुआत में दिप्रिंट से कहा. 33 वर्षीय बशीर ने बताया कि हमले के दौरान भी सांप्रदायिक ताने जारी रहे और हमलावरों में से एक ने बेपरवाही से कहा, “ये मुसलमान हैं. अभी एक को मारो, दूसरे को बाद में देख लेंगे.”

यह क्रूर हमला बुधवार को देहरादून के विकासनगर इलाके में हुआ.

इस घटना के बाद पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया, जब सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए. इन वीडियो में ताबिश को व्हीलचेयर पर बैठे देखा गया, उसके सिर पर पट्टियां बंधी हुई थीं. ताबिश और उसके भाई दोनों को कई चोटें आईं, जिनमें सिर की गंभीर चोटें और फ्रैक्चर शामिल हैं.

बशीर अहमद ने बताया कि ताबिश सर्दियों की छुट्टियों में उत्तराखंड आया था. उनका परिवार पिछले 20 साल से देहरादून में शॉल बेचने का काम कर रहा है. हमले वाले दिन ताबिश के पिता मोहम्मद यासीन बाहर गए हुए थे, इसलिए 17 वर्षीय ताबिश ने अपने बड़े भाई के साथ काम पर जाने की जिद की.

बाद में दोनों भाई अपने ठिकाने की ओर लौट रहे थे. इसी दौरान वे विकासनगर पुलिस स्टेशन से लगभग तीन किलोमीटर पश्चिम, डाकपत्थर रोड पर ककराती डॉक्टर की दुकान के पास स्थित किराना दुकान पर रुके.

“लौटते समय ताबिश डाकपत्थर रोड पर एक दुकान पर नाश्ता खरीदने रुका. दुकानदार ने शुरू में उसकी अनदेखी की. यह देखकर दोनों भाई आपस में कश्मीरी भाषा में बात करने लगे कि दुकानदार व्यस्त है और उन्हें अगली दुकान से सामान लेना चाहिए. दुकानदार ने उनकी बात को गलत समझ लिया, गुस्से में बाहर आया और उन पर कश्मीरी भाषा में गाली देने का आरोप लगाया,” बशीर ने दिप्रिंट को बताया.

दुकानदार ने पूछा कि वे कहां से हैं. जैसे ही दोनों ने खुद को कश्मीरी मुसलमान बताया, हालात बिगड़ते चले गए. बाद में स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप कर हमलावरों के चंगुल से दोनों भाइयों को छुड़ाया और उन्हें पास के एक अस्पताल ले गए. वहां से दोनों को आगे के इलाज के लिए देहरादून के एक निजी अस्पताल में भेजा गया.

तब तक स्थानीय समुदाय के लोग विकासनगर पुलिस चौकी पर जमा हो गए थे. वे भाइयों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे और नफरत के खिलाफ नारे लगा रहे थे.

घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने पुष्टि की है कि तीखी बहस के बाद हमला हुआ, और शुरुआत में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया था.

29 जनवरी को पुलिस ने औपचारिक रूप से दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार किया. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 117(2) और 352 के तहत मारपीट और अपमान का मामला दर्ज किया गया है. एफआईआर में नामजद एक अन्य आरोपी फिलहाल फरार है.

इस हमले ने एक कड़वी सच्चाई सामने रखी है—आज एक साधारण सा सवाल, “आप कहां से हैं,” जानलेवा बन सकता है. बशीर ने कहा कि कश्मीरियों को अक्सर रोका जाता है और उनसे पहचान पत्र मांगे जाते हैं. उनसे कहा जाता है, “तुम मुसलमान हो. तुम कश्मीर से हो. पाकिस्तान जाओ. बांग्लादेश जाओ.”

लेकिन बशीर ने कहा कि भारत किसी के बाप की जागीर नहीं है. “कश्मीर से कन्याकुमारी तक, हमें कहीं भी जाने का हक है. हमारा संविधान हमें किसी पर हाथ उठाने, किसी को ‘जय श्री राम’ कहने के लिए मजबूर करने, या पहचान के आधार पर किसी पर हमला करने की इजाजत नहीं देता.”

नफरत से जुड़े अपराध

बुधवार का यह हमला कोई अकेली घटना नहीं है. यह 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के आठ महीने से ज्यादा समय बाद कश्मीरी प्रवासियों के खिलाफ बढ़ते नफरत भरे अपराधों को लेकर फिर से डर पैदा करता है. उस हमले के बाद उत्तराखंड में कश्मीरी व्यापारियों पर हमलों की घटनाएं सामने आई थीं. उदाहरण के तौर पर, 25 दिसंबर को काशीपुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 28 वर्षीय कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हमला किया था.

बताया जा रहा है कि बुधवार की घटना के दौरान, जैसे ही दुकानदार को पता चला कि दोनों भाई कश्मीरी मुसलमान हैं, उसने पहलगाम का जिक्र किया और फिर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना को कश्मीरियों पर हुए “हालिया हमलों की श्रृंखला” का हिस्सा बताया है. उन्होंने पीड़ितों को अपनी सरकार का समर्थन देने का भरोसा दिलाया है. साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अलग-अलग राज्यों में संवेदनशीलता अभियान चलाने की मांग की है.

उमर अब्दुल्ला ने X पर लिखा, “यह नहीं कहा जा सकता कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में कश्मीर के लोग अपनी जान के डर में जी रहे हों. मेरी सरकार जहां भी जरूरी होगा, हस्तक्षेप करेगी और यह सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेगी कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय भी इसी तरह अन्य राज्यों को संवेदनशील बनाएगा.”

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के संयोजक नासिर खुहामी ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक से पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है. उन्होंने उत्तराखंड में कश्मीरी व्यापारियों की सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग का मुद्दा भी उठाया है.

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में दानिश ने कहा कि वह ताबिश के साथ विकासनगर इलाके में शॉल और सूट बेचने गया था. जब वह डाकपत्थर रोड के पास एक दुकान से नमक खरीदने गया, तो दुकानदार ने उससे पूछा कि वह कहां से है. उसने बताया कि वह कश्मीर से है.

एफआईआर के अनुसार, “इसके तुरंत बाद दुकानदार ने दो अज्ञात लोगों के साथ मिलकर भाइयों को गंदी और जाति आधारित गालियां देना शुरू कर दिया. इसके बाद दुकानदार और दोनों लोगों ने लाठियों और लोहे की रॉड से दोनों पर हमला किया, जिससे उनके सिर में चोटें आईं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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