नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को केंद्रीय बजट को ‘‘थकी और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट’’ करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण तथा बजट, आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्रीय बजट में भारत के सामने मौजूद वास्तविक संकटों से आंख मूंद ली गई।
लोककसभा में नेता प्रतिपक्ष ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘युवाओं के पास नौकरी नहीं है, विनिर्माण गिर रहा है, निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं, घरेलू बचत घट रही है, किसान संकट में हैं, आसन्न वैश्विक झटके, सभी को नजरअंदाज कर दिया गया।’’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय बजट को लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस सरकार के पास नीति, दृष्टि, समाधान और राजनीतिक इच्छा-शक्ति नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि वंचित वर्गों के लिए कोई सहायता नहीं दी गई और किसानों की भी उपेक्षा हुई है।
खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मोदी सरकार के पास अब नये विचारों की कमी दिखती है। बजट-2026 भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता। ‘मिशन मोड’ अब ‘चैलेंज रूट’ बन गया है। ‘सुधार एक्सप्रेस’ शायद ही कभी किसी ‘सुधार’ जंक्शन पर रुकती है।’’
उन्होंने दावा किया कि अब कोई नीति-दृष्टि नहीं है और कोई राजनीतिक इच्छा-शक्ति भी नहीं है।
खरगे ने आरोप लगाया, ‘‘यह एक थकी हुई और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट है। पहले तो यह पैसा नहीं देना चाहती और ऊपर से मिले बजट को भी खर्च नहीं करती।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कटाक्ष किया कि सीतारमण ने या तो आर्थिक सर्वेक्षण को नहीं पढ़ा या फिर उसे जानबूझकर दरकिनार कर दिया।
चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो कुछ सुनने को मिला, उससे अर्थशास्त्र का हर छात्र अवश्य ही स्तब्ध रह गया होगा। बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता। मौजूदा परिस्थितियों में बजट भाषण को उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए, जिनका जिक्र कुछ दिन पहले जारी आर्थिक समीक्षा 2025-26 में किया गया था।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘बजट भाषण और बजट, आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।’’
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण पारदर्शी नहीं रहा और इसमें प्रमुख कार्यक्रमों एवं योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की जानकारी नहीं दी गई।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘(बजट संबंधी) दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन करना अभी बाकी है, फिर भी 90 मिनट (के भाषण के) बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि बजट को लेकर जो उम्मीदें की गई थीं, उन पर यह पूरी तरह खरा नहीं उतरता। यह पूरी तरह से फीका और निराशाजनक रहा।’’
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