नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है और सप्लाई बनाए रखने के लिए मजबूत व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक बढ़ाया है और इसे 65 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा करने पर काम चल रहा है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की रिफाइनिंग क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. उन्होंने सदन और देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार ने कच्चे तेल और गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं.
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से कच्चे तेल, गैस और उर्वरक की बड़ी मात्रा में ढुलाई होती है. मौजूदा हालात के बीच सरकार का प्रयास है कि भारत को जहां से भी संभव हो, तेल और गैस की आपूर्ति मिलती रहे. हाल के दिनों में कई देशों से कच्चा तेल और एलपीजी लेकर जहाज भारत पहुंचे हैं और आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा.
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दशक में भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर लिया है, ताकि किसी एक देश या ईंधन पर अधिक निर्भरता न रहे. सरकार घरेलू गैस आपूर्ति को बढ़ाने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और एलपीजी कनेक्शन के विस्तार पर भी काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट से दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं, लेकिन भारत पर इसका असर कम से कम हो, इसके लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले बुवाई सीजन को देखते हुए किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली गई है, ताकि किसी संकट का बोझ किसानों पर न पड़े.
उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से देश इस स्थिति का बेहतर तरीके से सामना करेगा.
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