रांची, छह अक्टूबर (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्रों की सुरक्षा व शिक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने अधिकारियों को शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति का आकलन करने और उनमें सुधार तथा आधुनिकीकरण के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।
अदालत 10 अगस्त पिछले साल दर्ज की गई स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
मामला रांची के मध्य में स्थित ऐतिहासिक जिला स्कूल की खराब स्थिति को उजागर करने वाली खबरें प्रकाशित होने के बाद दायर किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि संबंधित विभाग के अधिकारी सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करें, मरम्मत, सुधार व आधुनिकीकरण की जरूरत का आकलन करें और इस संबंध में तुरंत कदम उठाएं।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि राज्य के कई स्कूलों में केवल एक शिक्षक के साथ पढ़ाई जारी है, जबकि छात्रों को असुरक्षित इमारतों में कक्षाएं लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अदालत ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा व शिक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि यह सरकार और संबंधित अधिकारियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि बच्चों को शिक्षा के लिए सुरक्षित और उचित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
इस मामले पर अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी।
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