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Friday, 27 March, 2026
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विवि के कुलपति को प्रोफेसर के खिलाफ आरोप पत्र जारी करने का अधिकार नहीं: उत्तराखंड उच्च न्यायालय

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नैनीताल, 20 मार्च (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा है कि पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति को किसी प्रोफेसर के खिलाफ आरोप पत्र जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने प्रोफेसर शिवेंद्र कश्यप द्वारा इस संबंध में दायर याचिका का निपटारा करते हुए विश्वविद्यालय को विवादित आरोप पत्र को तत्काल वापस लेने के निर्देश दिए।

कृषि संचार के प्रोफेसर कश्यप ने पांच फरवरी 2026 के आरोप पत्र और उसके परिणामस्वरूप उनके खिलाफ शुरू की गई विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। कश्यप डीएसटी-टीईसी (प्रौद्योगिकी सक्षम केंद्र) के समन्वयक भी हैं।

अदालत में कश्यप की ओर से पेश अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन और अपील) नियम, 2003 के अनुसार, नियुक्ति प्राधिकारी ही अनुशासनात्मक प्राधिकारी भी होता है और इस प्रकार आरोप पत्र अनिवार्य रूप से अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा ही जारी और हस्ताक्षरित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में, कथित रूप से कुलपति की ओर से काम कर रहे मुख्य कार्मिक अधिकारी द्वारा आरोप पत्र जारी किया गया है जो वैधानिक आदेश के विपरीत है।

उन्होंने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड द्वारा की जाती है न कि कुलपति द्वारा और इसलिए, कुलपति के पास आरोप पत्र जारी करने का अधिकार नहीं है।

उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि विवादित आरोपपत्र वापस ले लिया जाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई नया आरोप पत्र जारी किया जाता है तो याचिकाकर्ता कानून के अनुसार उसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र होगा।

भाषा सं दीप्ति सुरभि

सुरभि

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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