बेंगलुरु, 26 अक्टूबर (भाषा) ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा समारोह के आयोजन के प्रबंधन को लेकर मैसूरु के पूर्व राजपरिवार द्वारा अप्रसन्नता जताये जाने के बीच, कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धरमैया ने सोमवार को कहा कि महल बोर्ड और महल की जमीन सरकार की है, वहीं राजपरिवार को उचित सम्मान दिया जा रहा है।
यतींद्र सिद्धरमैया मैसूरु के पूर्व राजपरिवार की सदस्य प्रमोदा देवी वाडियार के उस पत्र पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने हाल ही में आयोजित दशहरा समारोह के प्रबंधन पर अप्रसन्नता जताई थी।
शहरी विकास मंत्री यतींद्र ने कहा कि राजपरिवार को रहने के लिए महल का एक हिस्सा आवंटित किया गया है और सरकार जंबू सवारी में इस्तेमाल होने वाले अंबारी (सोने के हौदे) के उपयोग के लिए भुगतान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार राजपरिवार के लगातार संपर्क में है और उसकी शिकायतों का समाधान करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘महल बोर्ड और जमीन सरकार की है। इसके बावजूद, हम राजपरिवार को उचित सम्मान देते हैं और दशहरा समारोह के आयोजन में उसका सहयोग मांगते हैं।’’
यतींद्र ने कहा कि सरकार शिकायतों की पड़ताल करेगी और आधिकारिक जवाब देगी। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रतिनिधि या तो उनसे मुलाकात करके मुद्दों पर चर्चा करेंगे या औपचारिक जवाब भेजेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर उन्हें कोई शिकायत है, तो वे सीधे सरकार के संज्ञान में ला सकते हैं। हम उनका समाधान करने के लिए तैयार हैं।’’ उन्होंने कहा कि राजपरिवार अपनी चिंताओं से सीधे सरकार को अवगत करा सकता था।
उन्होंने कहा कि दशहरा के दौरान सरकार के प्रतिनिधियों ने व्यक्तिगत रूप से राजपरिवार से मुलाकात की थी, उसके सदस्यों को समारोह में आमंत्रित किया था और उनका सहयोग मांगा था। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या उन्हें किसी सहायता की जरूरत है।
मुख्य हाथी के चयन के बारे में यतींद्र ने कहा कि वन विभाग को महेंद्र और धनंजय में से किसी एक को चुनने में समय लगा। उन्होंने कहा कि महेंद्र पहले अंबारी शोभायात्रा पूरी नहीं कर पाया था और बीच रास्ते में रुक गया था, इस कारण निर्णय लेने और इसकी जानकारी देने में देरी हुई।
उन्होंने कहा कि दशहरा में राजपरिवार द्वारा किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान शामिल होते हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि इनके आयोजन में मदद करे।
इस बीच, उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने स्थापित परंपराओं का पालन किया था और प्रमोदा देवी के नाराज होने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें ठेस पहुंची है, तो सरकार उनसे मुलाकात कर मामले को सुलझाने के लिए तैयार है।
परमेश्वर ने कहा, ‘‘अगर उन्हें किसी भी तरह से ठेस पहुंची है, तो हम व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात करके मामले का समाधान करेंगे।’’
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री पर प्रचार और लोकप्रियता हासिल करने के लिए दशहरा की परंपराओं का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
शिकारीपुरा के विधायक ने शिवकुमार की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया और जुलूस के दौरान उनकी पत्नी मौजूद थीं। उन्होंने दावा किया कि इस कदम की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई।
विजयेंद्र ने पिछले साल चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई जानलेवा भगदड़ को भी तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उस समय उनके उपमुख्यमंत्री रहे शिवकुमार के बीच लोकप्रियता हासिल करने की होड़ से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रचार पर ध्यान देने के कारण कर्नाटक की संस्कृति और परंपराओं की अनदेखी की।
भाषा अमित वैभव
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