जयपुर, एक अप्रैल (भाषा) राजस्थान में अजमेर दरगाह के खादिमों (सेवक) का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ‘अंजुमन सैयद जादगान’ ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन करने वाले सदस्यों की आलोचना करते हुए उन्हें मुसलमानों के हितों के खिलाफ काम करने वाले ‘नॉन स्टेट एक्टर्स’ (सरकार से इतर तत्व) करार दिया।
खादिम सलमान चिश्ती का एक आलेख सामने आने के बाद संस्था की ओर से यह आलोचना की गयी है।
एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित इस आलेख में सलमान चिश्ती ने विधेयक को मुस्लिम समुदाय के लिए ‘प्रगतिशील’ करार देते हुए इसका समर्थन किया है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने इस आलेख को ‘स्पष्टदर्शी’ बताते हुए सोशल मीडिया पर साझा किया।
अंजुमन संस्था के सचिव सरवर चिश्ती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सलमान दरगाह में सेवा करने वाले 5,000 खादिमों में से एक हैं।
सरवर ने कहा, “खादिमों की संस्था ने विधेयक की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। खादिम होने के नाते सलमान चिश्ती उस प्रस्ताव के खिलाफ नहीं जा सकते। उन्होंने खादिमों के नाम का दुरुपयोग किया है।”
उन्होंने कहा, “वह (सलमान चिश्ती) मीडिया से बातचीत में खुद को ‘दरगाह प्रमुख’ के रूप में पेश कर रहे हैं। वह दरगाह के प्रमुख नहीं हैं, बल्कि खादिम हैं। मुझे उनके व्यक्तिगत रूप से विधेयक का समर्थन करने से कोई समस्या नहीं है लेकिन वह खुद को दरगाह प्रमुख के रूप में पेश करते हुए हमारे द्वारा पारित प्रस्ताव के खिलाफ कोई रुख नहीं अपना सकते।”
सरवर ने दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन अली खान के बेटे नसीरुद्दीन द्वारा विधेयक का समर्थन करने के लिए भी आलोचना की।
चिश्ती ने दोहराया, “वे ‘नॉन-स्टेट एक्टर्स’ हैं, जो देश भर में मुस्लिम समुदाय के सामूहिक हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।”
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