नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक दल तेलुगु देसम पार्टी (तेदेपा) और मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने की दिशा में अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने संबंधी विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश कर सकती है।
यह प्रस्तावित कानून अमरावती को एकमात्र और स्थायी राजधानी बनाने के निर्णय को भविष्य में बदल दिए जाने के किसी भी ऐसे प्रयास को रोक देगा, जैसा कि वाईएसआर कांग्रेस अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा किया गया था।
बीते 28 मार्च को राज्य विधानसभा ने भी एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें आंध्र प्रदेश की नयी राजधानी के रूप में ‘‘अमरावती’’ का नाम शामिल करने के मकसद से आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा पांच में संशोधन के लिए केंद्र से अनुरोध किया गया।
वर्ष 2014 और 2019 के बीच विभाजित आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में तेदेपा प्रमुख नायडू ने घोषणा की थी कि अमरावती राज्य की राजधानी होगी और इसके विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा।
हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में तेदेपा ने सत्ता गवां दी और रेड्डी ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
अपने कार्यकाल के दौरान रेड्डी ने नायडू के फैसले को बदल दिया और घोषणा की कि आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियां होंगी जिसके तहत विशाखापत्तनम को प्रशासनिक राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी घोषित किया गया।
वर्ष 2024 में नायडू के सत्ता में लौटने के बाद, उन्होंने घोषणा की कि अमरावती राज्य की एकमात्र राजधानी होगी।
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था। उस अधिनियम हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बताया गया, लेकिन इसमें इसका कोई उल्लेख नहीं था कि आंध्र प्रदेश की राजधानी कहां बनेगी।
राजग सरकार द्वारा प्रस्तावित आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक अमरावती के दावे को राज्य की एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी मजबूती देगा।
तेदेपा राजग की एक प्रमुख सहयोगी है और लोकसभा में अपने 16 सांसदों के साथ नरेन्द्र मोदी सरकार को महत्वपूर्ण समर्थन देती है।
लोकसभा सदस्यों के बीच प्रसारित विधेयक के अनुसार, 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों में एक प्रवधान यह भी है कि नियत दिन से हैदराबाद 10 साल से अधिक की अवधि के लिए तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की साझा राजधानी होगी।
बाद में हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी होगी और आंध्र प्रदेश की नयी राजधानी होगी।
विधेयक में कहा गया है कि पुनर्गठन कानून अस्तित्व में आने के बाद, आंध्र प्रदेश सरकार ने, ‘उचित विचार, परामर्श और योजना के बाद, ‘अमरावती’ को उस राज्य की नयी राजधानी के रूप में पहचाना और अधिसूचित किया।
विधेयक के अधिनियम बन जाने के बाद 2 जून, 2024 से अमरावती को कानूनी रूप से आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में मान्यता दी जाएगी।
इसमें कहा गया है कि आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से अमरावती और उसके आसपास बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विधायी उपाय किए गए हैं।
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