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Wednesday, 11 February, 2026
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न्यायालय उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत मामले में सेंगर की अपील पर 17 फरवरी को करेगा सुनवाई

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नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर और अन्य द्वारा अपनी सजा के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई 17 फरवरी के लिए सूचीबद्ध की।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने उच्च न्यायालय को तीन महीने के भीतर अपीलों पर फैसला करने का निर्देश देने वाले उच्चतम न्यायालय के आदेश का संज्ञान लिया और कहा कि ‘‘अब इस मामले पर समयबद्ध तरीके से सुनवाई होगी।’’

बहरहाल, न्यायाधीश ने बुधवार को सुनवाई स्थगित कर दी क्योंकि उन्हें सूचित किया गया था कि पीड़िता की वह याचिका उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष लंबित है जिसमें 10 साल की सजा को बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। खंडपीठ इस पर मार्च में सुनवाई करेगी।

सेंगर के वकील ने कहा कि शीर्ष न्यायालय के आदेश को देखते हुए पीड़िता को सजा बढ़ाने की याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए याचिका दायर करनी चाहिए और अपील पर भी खंडपीठ द्वारा विचार किया जा सकता है।

न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई 17 फरवरी को करने का निर्देश दिया ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और कुलदीप सेंगर के भाई को दी गई अंतरिम जमानत तब तक के लिए बढ़ा दी गई।

जयदीप सेंगर ने मुंह के कैंसर से पीड़ित होने के कारण अपनी अंतरिम जमानत को तीन महीने के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था।

उच्च न्यायालय ने तीन जुलाई 2024 को जयदीप सेंगर को अंतरिम जमानत दी थी, जिसकी अवधि समय-समय पर बढ़ायी गयी।

कुलदीप सेंगर को नाबालिग पीड़िता से बलात्कार का दोषी पाया गया और 20 दिसंबर, 2019 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

सेंगर ने 2017 में पीड़िता का कथित तौर पर अपहरण किया और उससे दुष्कर्म किया था। उस वक्त वह नाबालिग थी।

पीड़िता के पिता की 13 मार्च, 2020 को हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सेंगर और उसके भाई जयदीप सेंगर उर्फ ​​अतुल सिंह को निचली अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

ऐसा आरोप है कि सेंगर और उसके भाई के इशारे पर लड़की के पिता को शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और पुलिस की बर्बरता के कारण 9 अप्रैल, 2018 को हिरासत में उनकी मौत हो गयी थी।

निचली अदालत ने कहा था कि परिवार के ‘‘इकलौते कमाने वाले सदस्य’’ की हत्या के लिए किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।

उच्चतम न्यायालय ने नौ फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय से उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सेंगर की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिका पर समयबद्ध तरीके से सुनवाई करने को कहा था और यह भी कहा कि इस पर तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए।

भाषा गोला नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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