अश्विनी श्रीवास्तव
नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) केन्द्र सरकार ने निर्णयों में तेजी लाने के लक्ष्य से बेहद महत्वपूर्ण फैसला करते हुए संयुक्त सचिवों को सीधे फाइलें लेकर मंत्रालय/विभाग के सचिव के पास जाने का अधिकार दे दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इससे पहले तक फाइलें संयुक्त सचिव के टेबल से पहले अतिरिक्त (एडिशनल) सचिव या उस श्रेणी के अधिकारी के पास जाती थीं, जहां से वह सचिव के पास पहुंचतीं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘केन्द्र सरकार के लगभग सभी विभागों में सरलीकरण के इस बड़े कदम को लागू किया जा रहा है। इसके तहत सभी संयुक्त सचिव या उस स्तर के अधिकारी सीधे सचिवों को और अवर (अंडर) सचिव या उप सचिव स्तर के अधिकारी सीधे अतिरिक्त सचिव या उस रैंक के अधिकारी को रिपोर्ट कर सकेंगे।’’
उन्होंने कहा कि इस कदम का लक्ष्य फैसले लेने की क्षमता को बढ़ाना है।
कार्मिक मंत्रालय के तहत आने वाले प्रशासनिक सुधार और जन शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने कहा कि सभी मंत्रालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि एक फाइल चार से ज्यादा अधिकारियों की मेज पर ना घूमे।
विभाग ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सभी मंत्रालयों को सलाह दी गई है कि मंत्रालय के भीतर या दो मंत्रालयों के बीच सर्कुलेशन के लिए कोई दस्तावेज या कागजी रसीद नहीं बनायी जानी चाहिए।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘मंत्रालय को सुनिश्चित करना चाहिए कि एक फाइल चार से ज्यादा स्तरों (रैंक) से होकर ना गुजरे।’’
इस प्रक्रिया को समझाते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे पूरी तरह लागू करने का मतलब है कि सभी संयुक्त सचिव या उस स्तर के अधिकारी सीधे सचिव को रिपोर्ट कर सकेंगे, ऐसे ही अंडर सचिव या उस स्तर के अधिकारी सीधे संयुक्त सचिव या उस स्तर के अफसर को और उप सचिव या उस स्तर के अधिकारी एडिशनल सचिव को सीधे रिपोर्ट कर सकेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘जिन 74 मंत्रालयों/विभागों ने स्व-मूल्यांकन प्रपत्र जमा किए हैं, उनमें से 91 प्रतिशत मंत्रालय/विभागों ने इसे लागू कर दिया है। लेकिन, कुछ मंत्रालय अभी भी ऐसे हैं जहां संयुक्त सचिव एडिशनल सचिव के माध्यम से रिपोर्ट करते हैं।’’
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रेल मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, आदिवासी मामलों के मंत्रालय, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, युवा मामलों के मंत्रालय, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, नाभिकीय ऊर्जा विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग आदि ने पूरी तरह से इसे अपना लिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, नागर विमानन मंत्रालय, स्टील मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, नयी एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने भी इस प्रक्रिया को पूर्ण रूप से अपना लिया है।
वहीं कुछ मंत्रालय ऐसे भी जिन्होंने इस प्रक्रिया को अभी आंशिक रूप से अपनाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गृहमंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग, सैन्य मामलों के विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने अभी तक इस प्रक्रिया को नहीं अपनाया है।
भाषा अर्पणा पवनेश
पवनेश
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