नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि निर्वाचित विधायक राज्यपालों की ‘दया’ पर निर्भर हैं।
तेलंगाना सरकार का न्यायालय के समक्ष यह टिप्पणी राज्य के राज्यपाल कार्यालय की ओर से शीर्ष अदालत को यह अवगत कराये जाने के बाद आई है कि उनके समक्ष कोई भी विधेयक मंजूरी के लिए लंबित नहीं है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की एक पीठ विधानसभा द्वारा पारित 10 विधेयकों को मंजूरी देने के लिए राज्य के राज्यपाल को दिशानिर्देश देने संबंधी राज्य सरकार की याचिका की सुनवाई कर रही थी। न्यायालय ने इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों का संज्ञान लिया और कार्यवाही बंद कर दी।
मेहता ने पीठ को सूचित किया कि उन्हें राज्यपाल के सचिव से एक संदेश मिला है, जिसमें कहा गया है, ‘‘अब, हमारे पास कोई विधेयक लंबित नहीं है।’’
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने पीठ से कहा, ‘‘निर्वाचित विधायक राज्यपालों की दया पर निर्भर हैं।’’
जब दवे ने कहा कि ऐसा केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में हो रहा है, इस पर मेहता ने कहा कि वह इस प्रकार की ‘हल्की’ टिप्पणी न करें।
पीठ ने कहा, ‘‘अब इस वक्त राज्यपाल के पास कुछ भी लंबित नहीं है।’’
मेहता और दवे के बीच उस वक्त एक जुबानी जंग देखने को मिली जब सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अदालत के सामने चिल्लाने से मदद नहीं मिलेगी।
प्रधान न्यायाधीश ने, हालांकि कहा कि पीठ मामले का निस्तारण करेगी।
शीर्ष अदालत ने 20 मार्च को तेलंगाना सरकार द्वारा दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था।
भाषा सुरेश माधव
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