हैदराबाद, 17 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में पहचान आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से प्रस्तावित रोहित वेमुला विधेयक के लिए सिफारिशें तैयार करने हेतु शुक्रवार को एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया।
उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क समिति के अध्यक्ष बनाये गये हैं तथा मंत्री डी श्रीधर बाबू, एन उत्तम कुमार रेड्डी, पोन्नम प्रभाकर और सी दामोदर राजनरसिम्हा उसके अन्य सदस्य हैं।
सरकार द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है, ‘‘सरकार रोहित वेमुला तेलंगाना (उच्च शिक्षा में पहचान आधारित भेदभाव की रोकथाम) विधेयक, 2026 पर उपयुक्त कानून बनाने के वास्ते अध्ययन करने और सिफारिशें/सुझाव देने हेतु एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति का गठन करती है।’’
आदेश में कहा गया है कि सरकार के विशेष मुख्य सचिव (अनुसूचित जाति विकास विभाग) उप-समिति के संयोजक होंगे।
आदेश में यह भी कहा गया है कि उप-समिति को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले साल मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को समाप्त करने के लिए ‘रोहित वेमुला अधिनियम’ बनाने को कहा था।
दलित छात्र रोहित वेमुला ने 2016 में कथित तौर पर हैदराबाद विश्वविद्यालय में जाति आधारित भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली थी।
वेमुला की मौत एक राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गई थी। राहुल गांधी ने संसद में केंद्र सरकार को चुनौती दी और तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इसे जातिगत संघर्ष के रूप में पेश करने के कथित प्रयासों की कड़ी निंदा की।
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 16 अप्रैल को कर्नाटक रोहित वेमुला (बहिष्करण या अन्याय की रोकथाम) (शिक्षा और गरिमा का अधिकार) विधेयक को मंजूरी दी।
भाषा राजकुमार अविनाश
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