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Friday, 10 April, 2026
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भूमि अधिग्रहण मामलों में ‘व्यवस्थागत खामी’, मिशन के आधार पर सुलझाएं : बंबई उच्च न्यायालय

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मुंबई, 19 फरवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण मामलों से निपटने में ‘बड़े पैमाने पर व्यवस्थागत खामी’ की वजह से भू-स्वामियों के मुआवजे से वंचित रहने को लेकर महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और उसे इन मामलों का समाधान करने के लिए ‘‘मिशन-मोड’’ अपनाने का निर्देश दिया है।

उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ ने मंगलवार को कहा कि स्वामित्व प्राप्त करने और परियोजना पूरी होने के बाद भी अधिग्रहण की कार्यवाही को पूरा करने में विफल रहना एक निरंतर गलत कार्य और संवैधानिक कर्तव्य के उल्लंघन के समान है।

अदालत ने यह टिप्पणी बीड जिले के कुछ निवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं की जमीनों को 1996 में सिंचाई विभाग द्वारा एक गांव में पानी की टंकी के निर्माण के लिए अधिग्रहित किया गया था, लेकिन अधिग्रहण की कार्यवाही अब तक पूरी नहीं हुई, जिसके कारण उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका था।

पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि प्रभावित भूस्वामियों में से कई किसान, निरक्षर या ग्रामीण हैं, जिन्हें औपचारिक अधिग्रहण कार्यवाही के बारे में या मुआवजे और वैधानिक ब्याज के हकदार होने के बारे में जानकारी भी नहीं होती।

अदालत ने कहा, ‘‘भूमि अधिग्रहण के मामलों में जो मुद्दे बार-बार इस अदालत के समक्ष आते हैं, वे राज्य प्रशासन की ओर से एक बेहद परेशान करने वाली और प्रणालीगत विफलता को उजागर करते हैं।’’

पीठ ने कहा कि वह इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि भूमि पर कब्जा लेने के बावजूद अधिग्रहण प्रक्रिया को पूरा करने में इस तरह की देरी और निष्क्रियता के ‘‘गंभीर और बहुआयामी परिणाम’’ होते हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘एक बार किसी नागरिक से जमीन का स्वामित्व प्राप्त कर लिया जाए, तो मुआवजे का निर्धारण करने और उसका भुगतान करने का दायित्व पूर्ण रूप से अनिवार्य हो जाता है।’’

पीठ ने रेखांकित किया कि ‘‘राज्य स्वयं को कल्याणकारी होने का दावा करता है और उसे इस तरह की अज्ञानता या लाचारी का फायदा उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’

पीठ ने कहा कि एक अच्छे राज्य की मजबूत नींव अच्छे कानून और अच्छी व्यवस्था होती है।

अदालत ने कहा कि ‘अच्छे कानून’ का अभिप्राय संरचना, मानक, अनुशासन और नियम है, जिनका हर परिस्थिति में पालन किया जाता है और ‘अच्छी व्यवस्था’ का अर्थ है सक्षम कार्यकारी अधिकारी और नौकरशाह, जो कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं। ये प्रत्येक अच्छे राज्य की मजबूत नींव का निर्माण करते हैं।

अदालत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े कई मामलों में उसने पाया है कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी वर्षों से इस प्रक्रिया को पूरा करने में पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे न केवल भूस्वामियों को कठिनाई हो रही है, बल्कि उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ रहा है।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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