scorecardresearch
Wednesday, 11 February, 2026
होमदेशउच्च न्यायालय की आलोचनात्मक टिप्पणी के खिलाफ न्यायिक अधिकारी की याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई करेगी

उच्च न्यायालय की आलोचनात्मक टिप्पणी के खिलाफ न्यायिक अधिकारी की याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई करेगी

Text Size:

नयी दिल्ली, फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के विरुद्ध एक न्यायिक अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई करने पर बुधवार को सहमति जताई, जिसमें उसे वैवाहिक कानूनों में ‘पुनश्चर्या (रिफ्रेशर) प्रशिक्षण’ कार्यक्रम से गुजरने का निर्देश दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष नवंबर में दिए गए अपने फैसले में यहां की एक कुटुंब अदालत के न्यायिक अधिकारी द्वारा वैवाहिक मामलों के निपटारे के लिए अपनाये गये तरीके को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी।

उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि न्यायिक अधिकारी को किसी भी अन्य वैवाहिक मामले का निपटारा करने से पहले, दिल्ली न्यायिक अकादमी के तत्वावधान में वैवाहिक कानूनों से जुड़े एक उपयुक्त और व्यापक ‘रिफ्रेशर’ प्रशिक्षण कार्यक्रम से शीघ्र ही गुजरना होगा।

दिल्ली के इस न्यायिक अधिकारी की याचिका पर बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।

पीठ ने न्यायिक अधिकारी की ओर से अदालत में उपस्थित वकील से पूछा, ‘‘उन्हें ये कड़े निर्देश क्यों जारी किये गये?’’

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘वह (न्यायिक अधिकारी) जिला न्यायाधीश के रूप में अनुच्छेद 142 में प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।’’

संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को उसके समक्ष आये किसी भी मामले में ‘पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक’ कोई भी निर्णय या आदेश पारित करने का अधिकार देता है।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले यह माना था कि संबंधित व्यक्ति को सुने बिना ऐसी कड़ी टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।

पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया और सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।

जब याचिकाकर्ता के वकील ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की दलील दी, तो पीठ ने कहा, ‘‘हम नोटिस जारी कर रहे हैं। आप और क्या चाहते हैं?’’

पीठ ने कहा, ‘‘यदि हम संतुष्ट होंगे, तो हम टिप्पणियों को हटा देंगे।’’ पीठ ने इस स्तर पर उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

उच्च न्यायालय ने एक वैवाहिक मामले में न्यायिक अधिकारी द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुनाया था।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments