नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के दिसंबर 2025 के उस आदेश के एक हिस्से पर शुक्रवार को रोक लगा दी, जिसमें लोकपाल को ‘‘नकद लेकर सवाल पूछने’’ के कथित मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को आरोपपत्र दाखिल करने की मंजूरी देने पर विचार करने को कहा गया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ लोकपाल की याचिका पर मोइत्रा, सीबीआई और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद एवं शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे को नोटिस जारी किए।
उच्च न्यायालय ने मोइत्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के लिए सीबीआई को मंजूरी देने संबंधी लोकपाल के आदेश को 19 दिसंबर, 2025 को निरस्त कर दिया था।
न्यायालय ने उस आदेश के पैरा 89 में कहा था, ‘‘हमने लोकपाल से अनुरोध किया है कि वह संबंधित प्रावधानों के अनुसार एक महीने के भीतर लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत स्वीकृति प्रदान करने पर विचार करें।’’
सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत उल्लिखित शक्तियों और प्रक्रियाओं से संबंधित याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए उच्च न्यायालय के फैसले के पैरा 89 पर रोक लगा दी।
कथित तौर पर पैसे लेकर सवाल पूछने का यह मामला इस आरोप से संबंधित है कि मोइत्रा ने एक व्यवसायी से नकदी और उपहार के बदले सदन में सवाल पूछे थे।
भाषा सिम्मी शोभना
शोभना
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