नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन ने एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने पिछले महीने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन ने यह कदम तब उठाया जब उनके संज्ञान में आया कि वह पहले इस मामले में अपीलकर्ता के वकील के रूप में पेश हो चुके थे।
न्यायमूर्ति विश्वनाथन को 19 मई, 2023 को सीधे बार से पदोन्नत कर उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया था। अप्रैल 2009 में उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था और पदोन्नति से पहले वह प्रमुख वकीलों में शामिल थे।
‘अल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा दायर इस मामले की सुनवाई एक अप्रैल को न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने की थी।
पीठ ने कहा, ‘इस मामले की अंतिम सुनवाई हुई थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। फैसला सुरक्षित रखने के बाद न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन के संज्ञान में आया कि वह इस मामले में मुख्य कर्जदार के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में अपीलकर्ता के वकील के रूप में पेश हुए थे।’
इस मामले में 17 मार्च को फैसला सुरक्षित रखा गया था।
इस घटनाक्रम के मद्देनजर पीठ ने 17 मार्च के अपने आदेश को वापस ले लिया और निर्देश दिया कि मामले को भारत के प्रधान न्यायाधीश के निर्देशानुसार किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
भाषा
प्रचेता गोला
गोला
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
