नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे न्यायमित्र के तौर पर काम कर रहे एक वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा तैयार की गई नियमावली (मैनुअल) पर विचार करने के बाद पुलिस की प्रेस वार्ता के लिए उचित नीति बनाएं।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ जांच के दौरान पुलिस द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित करने के तौर-तरीकों से संबंधित याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने 15 जनवरी के एक आदेश में वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन द्वारा किए गए ‘कठिन परिश्रम’ की सराहना की और कहा कि पुलिस नियमावली केंद्र सरकार के दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
न्यायालय ने हालांकि कहा कि राज्य सरकारों ने नियमावली पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई है।
पीठ ने कहा,‘‘हम राज्यों को यह निर्देश देना उचित समझते हैं कि वे सुविज्ञ न्याय मित्र द्वारा उपलब्ध कराए गए ‘प्रेस वार्ता से जुड़ी पुलिस नियमावली’ को ध्यान में रखते हुए प्रेस वार्ता के लिए एक उपयुक्त नीति तैयार करें। इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।’’
शीर्ष न्यायालय ने रजिस्ट्री को दो सप्ताह के भीतर नियमावली को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया।
चार भागों में विभाजित 60 पृष्ठों की इस नियमावली में कहा गया है कि इसका उद्देश्य पुलिस, जनता और मीडिया के बीच संचार के लिए एक सिद्धांतवादी, अधिकार-संगत और जांच-सुरक्षित ढांचा स्थापित करना है।
शीर्ष न्यायालय ने वर्ष 2023 में गृह मंत्रालय को आपराधिक मामलों के संबंध में पुलिसकर्मियों द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित किए जाने के संबंध में एक व्यापक नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया था।
न्यायालय ने कहा कि पक्षपातपूर्ण खबरों से जनता में यह संदेह पैदा होता है कि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि मीडिया में प्रसारित खबरें पीड़ित की निजता का उल्लंघन भी कर सकती हैं।
भाषा संतोष प्रशांत
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