नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) दिल्ली-एनसीआर में निर्माण परियोजनाओं और तोड़फोड़ कार्यों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा धूल नियंत्रण के वास्ते निर्धारित किए गए उपायों में कम लागत वाले वायु गुणवत्ता सेंसर और धूल अवरोधक लगाना तथा पानी की फुहार का छिड़काव और निर्माण सामग्री एवं कचरे को ढकना शामिल हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
निर्माण परियोजनाओं और तोड़फोड़ कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण उपाय को मजबूत करने तथा क्षेत्र में मलबा प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए सीएक्यूएम द्वारा जारी निर्देश को एक अप्रैल से लागू किया जाएगा।
यह निर्देश सबसे पहले 20 फरवरी को जारी किया गया था, जब आयोग ने पाया कि निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों से उत्पन्न धूल पूरे एनसीआर में परिवेशी वायु गुणवत्ता में प्रदूषक पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में लगातार योगदान दे रही है।
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएक्यूएम के तकनीकी सदस्य एस डी अत्री ने कहा कि मौजूदा वैधानिक दिशा-निर्देशों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आवधिक निरीक्षणों के बावजूद, धूल नियंत्रण मानदंडों के अनुपालन में कमियां हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली-एनसीआर में सड़क की धूल और निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से उत्पन्न धूल प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। सर्दियों के मौसम में धूल प्रदूषण में 15 प्रतिशत और गर्मियों के मौसम में 27 प्रतिशत का योगदान देती है। इसीलिए क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।’’
भाषा शफीक दिलीप
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