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Thursday, 30 April, 2026
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निकोबार की विशेष पारंपरिक झोपड़ियों को जल्द मिल सकता है जीआई टैग: अधिकारी

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(सुजीत नाथ)

पोर्ट ब्लेयर, नौ अप्रैल (भाषा) अंडमान निकोबार की पारंपरिक ‘होदी’ (एक तरह की नौका) को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) मिलने के बाद अब निकोबार में हेलमेट के आकार की पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली झोपड़ियों को भी जल्द यह पहचान मिल सकती है। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी।

अधिकारी ने बताया कि निकोबारी चटाई और कच्चे नारियल तेल को भी जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया है।

आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष राशिद यूसुफ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम इसे ‘चन्वी पटी-न्यी हुपुल’(निकोबारी झोपड़ी) कहते हैं और इसे जीआई टैग देने के लिए आवेदन किया है ताकि समुदाय के हितों की रक्षा की जा सके और इनकी प्रतिकृति बनाकर दुरुपयोग करने से रोका जा सके। इनकी प्रतिकृति की ब्रिक्री केंद्र शासित प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के हस्तशिल्प बाजार में की जाती है।’’

यूसुफ ने कहा, ‘‘ कुछ पंजीकृत आदिवासी सोसाइटी है और सभी ने निकोबारी झोपड़ी, चटाई और नारियल तेल को जीआई टैग दिलाने की पहल की।’’

जीआई दर्जा मुख्य रूप से एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में तैयार होने वाले किसी कृषि, प्राकृतिक या विनिर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान) को दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि निकोबारी झोपड़ी को लकड़ी और नारियल के पेड़ के पत्तों से बनाया जाता है और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन होने के साथ-साथ इसके भीतर गर्मियों में तापमान अपेक्षाकृत कम होता है। उन्होंने कहा कि ये झोपड़ियां भूकंप रोधी होती हैं।

यूसुफ ने कहा, ‘‘सामान्य झोपड़ियों से अलग इनका आधार ऊंचा होता है ताकि जंगली जानवरों और भारी बारिश से बचाव हो सके। इन झोपड़ियों का आकार उल्टे हेलमेट की तरह होता है और इनका व्यास 18 से 20 फुट और ऊंचाई 15 से 18 फुट के बीच होती है।

भाषा धीरज अमित

अमित

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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