scorecardresearch
Saturday, 21 March, 2026
होमदेशदक्षिण भारत के नेताओं ने हिंदी के बारे में शाह के बयान पर विरोध जताया

दक्षिण भारत के नेताओं ने हिंदी के बारे में शाह के बयान पर विरोध जताया

Text Size:

चेन्नई/हैदराबाद/कन्नूर, नौ अप्रैल (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिंदी पर दिए गए बयान पर भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी अन्नाद्रमुक समेत दक्षिण भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों का विरोध का रुख शनिवार को भी जारी रहा। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम ने कहा कि भाषा को थोपा नहीं जा सकता।

शाह ने कहा था कि हिंदी अंग्रेजी का विकल्प हो सकती है। उनकी इस टिप्पणी पर तेलंगाना के वरिष्ठ मंत्री के टी रामाराव ने कहा कि देश में ‘‘भाषा के वर्चस्व और आधिपत्य’’ का प्रयास सफल नहीं होगा।

वहीं, तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के समन्वयक पनीरसेल्वम ने कहा कि लोग अपनी मर्जी से हिंदी सीख सकते हैं, लेकिन हिंदी को थोपा जाना अस्वीकार्य है।

दिवंगत द्रविड़ नेता सी एन अन्नादुरै का हवाला देते हुए पनीरसेल्वम ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ेगी तो जो लोग हिंदी सीखना चाहते हैं, वे अपनी इच्छा से ऐसा करेंगे, लेकिन लोगों पर हिंदी थोपना कभी भी स्वीकार नहीं नहीं किया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने ट्वीट किया कि उनकी पार्टी की अन्नादुरै की विचारधारा के अनुरूप तमिल और अंग्रेजी की दो भाषाओं की नीति पर दृढ़ता से कायम है।

इस बीच, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को कहा कि हिंदी को थोपने के कदम को स्वीकार नहीं किया जाएगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के 23वें सम्मेलन के तहत केंद्र-राज्य संबंधों पर आयोजित एक सेमिनार में विजयन ने कहा कि भारत को विविधता में एकता के लिए जाना जाता है और संघ परिवार का एजेंडा इस विविधता को मान्यता नहीं देता।

विजयन ने कहा, “भारत ऐसा देश है जिसे विविधता में एकता के लिए जाना जाता है। इस विचार का अर्थ है विविधता को स्वीकार करना। हमारे संविधान ने भी भारत की कई भाषाओं को महत्व दिया है। अधिकतर राज्य लंबे संघर्ष के बाद भाषा के आधार पर बने थे। संघ परिवार का एजेंडा देश की विविधता और संघीय ढांचे को स्वीकार नहीं करता। क्षेत्रीय भाषाओं को कमजोर करना उनके एजेंडे का हिस्सा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषाएं हर समाज की संस्कृति और जीवन का आधार हैं और अगर भाषा की हत्या कर दी जाएगी तो यह विविधता नष्ट हो जाएगी।

उधर, तेलंगाना में सत्तारूढ़ दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बेटे रामा राव ने कहा कि वैश्विक आकांक्षाओं वाले देश के युवाओं पर हिंदी थोपना बहुत बड़ा नुकसान होगा।

राव ने ‘हिंदी थोपना बंद करो’ हैशटैग के साथ ट्वीट किया, ‘‘प्रिय अमित शाह जी अनेकता में एकता ही हमारी ताकत है। भारत राज्यों का एक संघ है और एक सच्चा ‘वसुधैव कुटुम्बम’ है। हम अपने महान राष्ट्र के लोगों को यह तय क्यों नहीं करने देते कि क्या खाएं, क्या पहनें, क्या प्रार्थना करें और किस भाषा में बात करें।’’

रामा राव ने कहा, ‘‘मैं पहले एक भारतीय हूं, बाद में गर्वित तेलुगू और तेलंगानावासी हूं। मैं अपनी मातृभाषा तेलुगू, अंग्रेजी, हिंदी और थोड़ी बहुत उर्दू भी बोल सकता हूं। हिंदी को थोपने और अंग्रेजी का अनादर करने से देश के उन युवाओं के लिए नुकसानदेह साबित होगा, जिनकी वैश्विक आकांक्षाएं हैं।’’

अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कहा था कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं की बजाय अंग्रेजी के विकल्प के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। शाह ने संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय किया है कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और यह निश्चित तौर पर हिंदी के महत्व को बढ़ाएगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भी शाह की टिप्पणी का विरोध किया था।

एमडीएमके के संस्थापक और राज्यसभा सदस्य वाइको ने आगाह किया कि ‘‘हिंदी के बारे में अमित शाह की राय देश की एकता को नुकसान पहुंचाएगी।

इस बीच, ऑस्कर पुरस्कार विजेता ए आर रहमान द्वारा तमिल भाषा को लेकर डाली गई एक तस्वीर के चलते सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया है। रहमान ने एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा ‘तमिषानंगु’, जो तमिल भाषा को समर्पित गीत को इंगित करता है।

तस्वीर के नीचे लिखी गई पंक्ति तमिल राष्ट्रवादी कवि भारतीदासन की एक कविता की है और इसका अर्थ है कि तमिल भाषा तमिल लोगों के अधिकार का मूल है। रहमान द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर में लाल पृष्ठभूमि में सफेद साड़ी पहने एक महिला को दिखाया गया है जो तमिल भाषी लोगों की भावनाओं और हिंदी थोपने के विरोध के संदर्भ में प्रतीत होती है।

सोशल मीडिया के एक वर्ग ने रहमान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने लाल पृष्ठभूमि में तस्वीर पोस्ट कर हिंदी का विरोध और तमिल को पूर्ण समर्थन दिया है, वहीं अन्य लोगों ने तस्वीर पोस्ट करने के उनके इरादे पर सवाल उठाया। ट्विटर पर एक उपयोगकर्ता ने कहा कि संगीत निर्देशक ने हिंदी फिल्मों में काम कर के पैसा कमाया और लोकप्रियता हासिल की और अब वह हिंदी को निशाना बना रहे हैं।

भाषा

शफीक माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments