शिमला, 24 अक्टूबर (भाषा) शिमला के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी धन के कथित गबन और दुरुपयोग, धोखाधड़ी तथा अन्य संबंधित अपराधों के दो मामलों की जांच के लिए तीन-सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) मेहर पंवार की निगरानी में एसआईटी का गठन किया है। इसमें सदर थाने के प्रभारी विवेक गौतम, पश्चिम थाने के प्रभारी अंकुश ठाकुर और शिमला विशेष प्रकोष्ठ के उपनिरीक्षक अंबी लाल शामिल हैं।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, एसआईटी को दोनों प्राथमिकी की गहन और निष्पक्ष जांच करने तथा साक्ष्यों के आधार पर दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों, आरोपियों और अपराध के तरीकों का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दल को दस्तावेजी, वित्तीय और डिजिटल साक्ष्य जुटाने तथा उनकी जांच करने के साथ ही कथित अपराधों में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका निर्धारित करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने, दल के सदस्यों के बीच समन्वय बनाए रखने और निगरानी अधिकारी को नियमित रूप से जांच की प्रगति की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
गांधी 23 जनवरी 2023 से छह फरवरी 2026 तक शिमला के एसएसपी थे। उन पर एक मामले में रामपुर और शोघी में पुलिस भवनों तथा आवासीय परिसरों की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए निर्धारित सरकारी धनराशि में से 14.07 लाख रुपये के कथित दुरुपयोग का आरोप है। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान इस धनराशि का इस्तेमाल शिमला स्थित उनके आधिकारिक आवास पर किया गया।
एक अन्य मामले में गांधी पर वर्ष 2024 और 2025 के दौरान पुलिस लाइंस, कैथू में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल के साथ धोखाधड़ी करने, सरकारी धनराशि से दो लाख 35 हजार रुपये का कथित गबन करने, बेईमानी से धन प्राप्त करने तथा जाली दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
गांधी ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया है कि अतीत में पुलिस विभाग में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
भाषा शोभना सुरेश
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