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Thursday, 16 April, 2026
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श्री बागेश्वर जन सेवा समिति को विदेशी धन प्राप्त करने के लिए केंद्र से मंजूरी मिली

बागेश्वर धाम की वेबसाइट के अनुसार, समिति ही वह खाता धारक है, जिसके माध्यम से लोग संगठन द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के समर्थन के लिए योगदान कर सकते हैं.

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नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने श्री बागेश्वर जन सेवा समिति को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकरण प्रदान कर दिया है, जिससे यह धार्मिक संगठन अब विदेशी धन प्राप्त करने का पात्र हो गया है.

यह समिति 29 वर्षीय कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में संचालित होती है और इसे एक धार्मिक (हिंदू), सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक संगठन के रूप में वर्णित किया गया है.

बागेश्वर धाम की वेबसाइट के अनुसार, समिति ही वह खाता धारक है, जिसके माध्यम से लोग संगठन द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के समर्थन के लिए योगदान कर सकते हैं.

यह संगठन उन 38 संस्थाओं में शामिल है, जिन्हें इस वर्ष गृह मंत्रालय ने विदेशी धन प्राप्त करने की अनुमति दी है. इनमें रामकृष्ण मठ बोलपुर, कर्नाटक में श्री रामकृष्ण शारदा आश्रम, पूर्णिया में रामकृष्ण मठ, नयी दिल्ली के जनकपुरी में शिखर धवन फाउंडेशन, एनआईआईटी फाउंडेशन और एचसीएल फाउंडेशन सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं.

एफसीआरए के तहत पंजीकरण किसी भी व्यक्ति या संस्था के लिए विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए अनिवार्य होता है. इसके लिए संबंधित संस्था का स्पष्ट सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम होना चाहिए और वह एफसीआरए के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल नहीं होनी चाहिए.

एफसीआरए के तहत यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए वैध होता है.

वर्तमान में लगभग 16,000 संस्थाएं एफसीआरए के तहत पंजीकृत हैं और वे हर वर्ष करीब 22,000 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान प्राप्त करती हैं, जैसा कि हाल ही में अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में बताया गया है.

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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