नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को शिवसेना (उबाठा) नेताओं पर आरोप लगाया कि वे सत्ता की चाह में और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा और बालासाहेब ठाकरे की विरासत को छोड़ रहे हैं।
दुबे ने कहा कि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ही शिवसेना संस्थापक की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
भाजपा सांसद ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘सिर्फ सत्ता पाने और सिर्फ मोदी जी का विरोध करने के लिए, वे विचारधारा को छोड़ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शिवसेना की असली ताकत क्या है। उद्धव ठाकरे के पास है या एकनाथ शिंदे के पास? बालासाहेब ठाकरे दोनों की ताकत हैं। लेकिन एकनाथ शिंदे ही बालासाहेब ठाकरे की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वह बालासाहेब के नक्शेकदम पर चल रहे हैं, हिंदुत्व का झंडा उठा रहे हैं और भाजपा नीत सरकार का हिस्सा हैं।’’
दुबे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस से गठबंधन किया, जिसे बालासाहेब ने कभी मंजूरी नहीं दी थी। उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे को सलाह देने वाले संजय राउत और अरविंद सावंत हैं, जिनका हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है।
बालासाहेब ठाकरे के बंदूक लाइसेंस को रद्द किए जाने के बारे में सावंत द्वारा लोकसभा में उठाए गए सवाल का ज़िक्र करते हुए, दुबे ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) नेता ने ‘‘इतिहास’’ या ‘‘भूगोल’’ की सही जानकारी के बिना यह मुद्दा उठाया था।
उन्होंने कहा, ‘‘कल मैंने संसद में कहा था कि शिवसेना के अरविंद सावंत को इतिहास या भूगोल का कोई ज्ञान नहीं है। 1969 में, बालासाहेब ठाकरे की पत्नी मीनाताई ठाकरे पर गोलियां चलाई गईं थीं, जिन्हें देवी की तरह पूजा जाता है।’’
दुबे ने कहा कि यह घटना तब हुई जब ठाकरे किसी निर्वाचित पद पर नहीं थे और शिवसेना अभी तक एक बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम शिवसेना संस्थापक के खिलाफ कांग्रेस की राजनीतिक साजिश का हिस्सा था।
उन्होंने कहा, ‘‘संसद में यह सवाल उठाया गया था कि उनका रिवॉल्वर लाइसेंस कैसे रद्द किया गया। उस समय वह (बालासाहेब ठाकरे) न तो सांसद थे और न ही विधायक, और शिवसेना भी कोई बहुत बड़ी पार्टी नहीं थी।’’
दुबे ने कहा, ‘‘बाद में, जब उन्हें 1976-77 के आसपास पूरी साजिश के बारे में पता चला और उन्हें एहसास हुआ कि कांग्रेस ने उन्हें निशाना बनाया है, तो बालासाहेब ने एक बहुत दमदार भाषण दिया था और कहा कि वह समझौता करने और इंदिरा गांधी या कांग्रेस का सहयोगी बनने के बजाय मरना पसंद करेंगे।’’
भाषा वैभव माधव
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