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Tuesday, 28 April, 2026
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एससीओ बैठक: राजनाथ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र कर सरकार प्रायोजित आतंकवाद पर दी चेतावनी

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(फोटो सहित)

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत के ‘‘दृढ़ संकल्प’’ को दिखाया कि ‘‘आतंकवाद के केंद्रों को न्यायोचित दंड से अब छूट नहीं है।’’

उनके इस बयान को सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रभावशाली समूह को “सरकार प्रायोजित” सीमा-पार आतंकवाद के मुद्दे की अनदेखी नहीं करना चाहिए और इस खतरे से निपटने में किसी भी तरह के “दोहरे मापदंड” के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।

संघर्षों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि ‘‘ताकत की असली परीक्षा’’ उसका गरीबों और कमजोरों के खिलाफ इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि उसका इस्तेमाल उनके हित में करना है जो अपनी रक्षा करने में समर्थ नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक सहमति पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जहां ‘सह-अस्तित्व, सह-जीवन और करुणा को अराजकता, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष पर प्राथमिकता दी जाए।’

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एससीओ को आतंकवादियों को ‘‘सहयोग देने, पनाह देने और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने’’ वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें सरकार द्वारा प्रायोजित उस सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जो किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है। दोहरे मापदंड की कोई गुंजाइश नहीं है और एससीओ को आतंकवादियों को उकसाने, उन्हें पनाह देने और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।’’

रक्षा मंत्री ने आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की वकालत की। उन्होंने चीन, रूस और समूह के अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की उपस्थिति में कहा, ‘‘आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से बदलकर शांति और समृद्धि की मजबूत नींव में परिवर्तित कर सकते हैं।’’

सिंह ने आतंकवाद को उभरती वैश्विक व्यवस्था के लिए “सबसे गंभीर खतरा” बताया और कहा कि आतंकवाद-रोधी सहयोग एससीओ का एक “मूलभूत सिद्धांत” रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘22 अप्रैल को हमने पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के पीड़ितों को याद किया। पहलगाम में हुए नरसंहार ने पूरी मानवता को झकझोर दिया।’’

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने अपना दृढ़ संकल्प दिखाया कि आतंकवाद के केंद्रों को न्यायोचित दंड से अब छूट नहीं है।’’

सिंह ने पिछले साल चीन के तियानजिन शहर में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में जारी घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इसने आतंकवाद के खिलाफ एक दृढ़ और सामूहिक रुख को सामने लाया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता और कोई धर्म नहीं होता। कोई भी शिकायत, चाहे वास्तविक हो या काल्पनिक, आतंकवाद और मानवीय क्षति का बहाना नहीं बन सकती।’’

सिंह ने एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और “आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ की ओर ले जाने वाले कट्टरपंथ का मुकाबला” विषय पर राष्ट्राध्यक्षों के संयुक्त बयान का भी उल्लेख किया, जो इस समूह की भारत की अध्यक्षता के दौरान जारी किया गया था।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए, एससीओ की ‘‘अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘क्या हमें एक नयी विश्व व्यवस्था चाहिए या एक अधिक व्यवस्थित दुनिया? हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां इस दुनिया के प्रत्येक नागरिक के साथ गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाए। हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां मतभेद विवाद न बनें और विवाद आपदाओं का कारण न बनें।’’

सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करना एससीओ की जिम्मेदारी है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि एससीओ के पास शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए आवश्यक शक्ति और संकल्प मौजूद है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ इसी एकता और साथ रहने की भावना को दर्शाता है।

सिंह सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे थे।

भाषा आशीष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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