Sunday, 26 June, 2022
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मेटावर्स में स्कूल और यूनिवर्सिटी? क्यों वर्चुअल रियलिटी एडटेक को अपनी ओर खींच रहा है

अब तक भारतीय शिक्षा में तकनीकी बूम की खासियत ऑनलाइन वीडियो सेशन और रिकॉर्डिड क्लासेज रहीं है. लेकिन अब मेटावर्स में वर्चुअल क्लासरूम इससे आगे की कड़ी के रूप में सामने आ रहा है.

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नई दिल्ली: एक जूस की दुकान, टेबल के इर्द-गिर्द घूमता एक वेटर लोगों से ऑर्डर ले रहा है और उन तक खाने-पीने का सामान पहुंचा रहा है. और साथ ही, कितना बिल हुआ उसे भी जोड़ने में लगा है.

लेकिन यह दुकान असली नहीं है और सिर्फ दुकान ही नहीं वेटर और ग्राहक भी वर्चुअल अवतार हैं.

वर्चुअल अवतार! ये क्या है और यहां वास्तव में हो क्या हो रहा है? ये सवाल आपके मन में आ रहा होगा. मेटावर्स क्लासरूम के समर्थकों के मुताबिक एडटेक सेक्टर में होने वाला ये कुछ नया है और भविष्य में बच्चों को आप कुछ इस तरह से शिक्षा लेते हुए देख सकते हैं.

वर्चुअल जूस की दुकान लाभ और हानि सिखाने के लिए के लिए की गई सेटिंग हो सकती है. वे कहते हैं, एक दूसरी क्लास में छात्र सेविंग और टैक्स विषय पढ़ने के लिए आभासी बाजार में खरीदारी कर सकते हैं. और यह सब वे अपने घरों में आराम से बैठकर करेंगे. इसके लिए उन्हें कहीं आने-जाने की जरूरत नहीं है.

मेटावर्स थ्री डायमेंशनल आभासी दुनिया का एक नेटवर्क है जो जीवित लोगों के अवतारों से आबाद है. इस उद्योग से जुड़े कुछ दिग्गजों ने इसे भारतीय एडटेक के लिए आने वाले समय में ‘एक बड़ी’ चीज कहा है और 2032 तक 30 बिलियन डॉलर के उद्योग में विकसित होने की उम्मीद जता रहे हैं.

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अब तक एडटेक बूम के लिए ऑनलाइन वीडियो सेशन और पहले से रिकॉर्ड की गई क्लासेज ही इसकी खासियत थी, जहां ‘इंटरैक्टिव’ होने का मतलब था कि छात्र न समझ आने पर अपना हाथ उठा सकते हैं और मन में उठ रहे सवालों का जवाब पा सकते हैं.

लेकिन एक नई तस्वीर में एडटेक सेक्टर मेटावर्स के साथ मिलाकर 3 डी के जरिए ‘सीखने के अनुभव’ की पेशकश कर रहा है, जहां छात्र खुद के आभासी अवतार के रूप में केस स्टडी में भाग लेकर सीख सकते हैं. फिलहाल तक तो सीखने-सिखाने के ये सभी विषय अभी तक उनकी किताबों के पन्नों पर ही मौजूद हैं.

UnfoldU नामक इस कंपनी का मकसद ‘ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के जरिए छात्रों को बेहद कम कीमतों पर ट्यूशन देना’ है. लेकिन इस कंपनी ने मार्च में अपना ब्लॉकचेन और मेटावर्स-पॉवर्ड UnfoldU2.0 प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है. यह ‘मेगा एजुकेशन मेटावर्सिटी’ के उसके लक्ष्य की दिशा में एक कदम है.

पिछले हफ्ते टेस्ट-प्रीप विशाल करियर लॉन्चर ने छात्रों के लिए एक मेटावर्स, सीएल मेटा के लॉन्च की घोषणा की. यह वर्चुअल क्लासरूम, स्टडी रूम, करियर काउंसलिंग सेक्शन और छात्रों के लिए शैक्षिक उत्पादों को खरीदने के लिए एक वर्चुअल शॉपिंग मॉल है.

बुधवार को आईआईटी-जोधपुर ने 2022-23 से शुरू होने वाले सेमेस्टर में ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और वीआर में काम करने वाले पेशेवरों के लिए पार्ट टाइम ऑनलाइन एमटेक कार्यक्रम शुरू किया है.

इस बीच, ‘मेटावर्सिटीज’ स्थापित करने के प्रयास चल रहे हैं. बेंगलुरु के एक ‘ऑनलाइन स्कूल’ ने दिप्रिंट को बताया कि उसकी अपने छात्रों के लिए मेटावर्स लाने की योजना है.

मेटावर्स का समर्थकों के मुताबिक उनके घोषित उद्देश्यों में दूर-दराज में रह रहे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर ले जाना है, ताकि ‘शिक्षा का लोकतंत्रीकरण’ किया जा सके. यानी हर बच्चे को बेहतर शिक्षा मिल सके. लेकिन कुछ विशेषज्ञ अभी भी इसकी पहुंच और प्रभाव के बारे में अलग-अलग राय रखते हैं.


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एडटेक और मेटावर्स

मेटावर्स में तीन प्रमुख चीजें शामिल हैं: वीआर (वर्चुअल रियलिटी) इंटरफ़ेस, डिजिटल ओनरशिप और पर्सनलाइज्ड अवतार.

अमेरिकी लेखक नील स्टीफेंसन के 1992 के उपन्यास ‘स्नो क्रैश’ में पहली बार ‘मेटावर्स’ शब्द की इस्तेमाल किया गया था. कोविड-19 महामारी के दौरान वीडियो गेम रोबॉक्स और फ़ोर्टनाइट ने इस शब्द को लोकप्रिय बना दिया और 2021 में मेटा (पहले फेसबुक) के वीआर सोशल प्लेटफॉर्म के लॉन्च के बाद इसे आगे बढ़ने के रास्ते मिल गए.

शोध रिपोर्टों से मिले संकेतों के मुताबिक, 2024 तक मेटावर्स के लिए बाजार का अवसर 800 बिलियन डॉलर (लगभग 59,58,719 करोड़ रुपये) तक बढ़ सकता है.

एडटेक क्षेत्र में वेदांतु या बायजू’ज़ जैसे दिग्गजों ने अभी तक प्रवेश नहीं किया है, लेकिन बाजार के नए खिलाड़ियों ने भविष्य के लिए संकेत दे दिए हैं.

सीएल मेटा के बारे में बात करते हुए करियर लॉन्चर के चीफ बिजनेस ऑफिसर सुजाता क्षीरसागर ने कहा कि उन्होंने ‘हमारे फिजिकल ऑफिस में एक कियोस्क स्थापित किया है और छात्र एवी / वीआर सिस्टम के साथ इंटरेक्ट कर रहे हैं.’

वह आगे बताती हैं, ‘चूंकि तकनीक अभी भी अपने शुरूआती चरण में है, इसलिए हमें इसे बड़े स्तर पर लॉन्च करना बाकी है. हमें विश्वास है कि हम ऑनलाइन लर्निंग के भविष्य की दिशा में बढ़ रहे है.’

आईआईटी जोधपुर में स्कूल ऑफ एआई एंड डेटा साइंस के विभागाध्यक्ष डॉ नीरज जैन ने कहा, ‘एआर और वीआर भविष्य की तकनीक है जो स्वास्थ्य देखभाल, डायग्नोसिटक, रोबोटिक्स गेमिंग, उपभोक्ता अनुभव और जहां कहीं भी हमें एक इमर्सिव अनुभव की जरूरत होती है, जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण और तेजी से प्रमुख भूमिका निभाने जा रही है.’

वह आगे कहते हैं, ‘यह वह क्षेत्र है जहां तकनीक आगे की तरफ बढ़ रही है. इससे उन लोगों के लिए नौकरी के अवसर बढ़ेंगे जो एआर/वीआर में विशेषज्ञ हैं’ जैन ने बताया कि ‘यह कोर्स कामकाजी पेशेवरों को उभरते नौकरी बाजार के लिए भविष्य के लिए तैयार होने का अवसर प्रदान करेगा.’


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इनवैक्ट मेटावर्सिटी, 21K स्कूल

सह-संस्थापक तनय प्रताप ने कहा, ‘इनवैक्ट मेटावर्सिटी एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जिसका उद्देश्य मेटावर्स में वर्चुअल यूनिवर्सिटी बनाना है. यह टियर-2, टियर-3, टियर-4, टियर-5 और टियर-6 शहरों के उन छात्रों की तरफ देख रहे हैं जो अपनी क्लास के टॉप स्टूडेंट नहीं हैं.’

प्रताप ने दिप्रिंट को बताया, ‘सभी छात्र आईआईटी और आईआईएम जैसे विशिष्ट संस्थानों में जगह नहीं बना सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें अच्छी शिक्षा हासिल करने का अवसर नहीं मिलना चाहिए. इनवैक्ट में हमारा उद्देश्य एक ऐसा शिक्षण मंच बनाना है जो कम कीमतों में बेहतरीन शिक्षा दे और 2डी दुनिया से परे हो.’

इनवैक्ट मेटावर्सिटी में मेटावर्स ‘बिजनेस फेलोशिप’ कोर्स जून में लाइव होना था, लेकिन इसके सह-संस्थापकों – पूर्व माइक्रोसॉफ्ट इंजीनियर तनय प्रताप और ट्विटर इंडिया के पूर्व प्रमुख मनीष माहेश्वरी के बीच मतभेद के कारण देरी हुई.

प्रताप ने कहा, ‘हमने अपने पहले ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए जबरदस्त रूझान देखा और कई कामकाजी पेशेवरों ने इसके लिए साइन अप किया. अगले 6-8 सप्ताह में पाठ्यक्रम के लाइव होने की संभावना है.’

उन्होंने कहा कि इनवैक्ट मेटावर्सिटी के छात्र अपने असाइनमेंट और प्रोजेक्ट को नॉन-फंजिबल टोकन (एनएफटी) में बदलने में सक्षम होंगे. यह उन्हें अपने काम का एकमात्र स्वामित्व रखने की अनुमति देगा, जिससे वे जब चाहें अपने एनएफटी को बेच सकते हैं.

इनवैक्ट मेटावर्सिटी वाले 16 सप्ताह के कोर्स की कीमत 2 लाख रुपये है. प्रताप ने कहा कि 2022 में पहले कार्यक्रम के लिए 3,000 आवेदकों में से केवल 70 को ही प्रवेश दिया गया था. इनवैक्ट मेटावर्सिटी के छात्रों को अपस्किलिंग कोर्स का डिग्री सर्टिफिकेट मिलेगा.

मेटावर्स क्लासरूम का एक अन्य समर्थक बेंगलुरु स्थित 21k स्कूल है. यह एक ऑनलाइन स्कूल है, जो अपने लॉन्च के दो सालों के भीतर 6,000 नामांकन दर्ज करने का दावा करता है.

21k स्कूल के सह-संस्थापक यशवंत राज पी ने कहा, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप, हमने छात्रों को अध्ययन करने के लिए फ्लेक्सिबिलिटी दी है. वे अमेरिकी, ब्रिटिश और भारतीय बोर्डों के बीच चयन कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘वे बैच का चयन भी अपनी मर्जी से कर सकते हैं. हमारा पूरा ध्यान मुख्य विषयों पर है. इसका मतलब है कि प्राइमरी ग्रेड के छात्रों को सिर्फ तीन घंटे अध्ययन करना होगा.’

इस वर्चुअल स्कूल में एक छात्र के पढ़ने का खर्च 60,000 रुपये प्रतिवर्ष तक है.

यशवंत राज पी ने कहा, ‘मशीन लर्निंग और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से, हम छात्र के रोजाना की परफॉर्मेंस पर नजर बनाए रख सकते हैं. इससे आगे पढ़ाए जाने वाले पाठ के बारे में उनके स्तर को जानने में मदद मिल पाएगी.’  ‘वह आगे कहते हैं, हम मेटावर्स में शिक्षा शुरू करना चाहते हैं ताकि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले हमारे छात्र एक-दूसरे के साथ इंटेरैक्ट कर सकें.’

यशवंत राज पी ने कहा कि वह और उनकी टीम ‘भारी-भरकम वीआर सेट के मसले को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. क्योंकि इसके लंबे समय तक इस्तेमाल करने से छात्रों को परेशानी हो सकती है.’

21K स्कूल की विज्ञान शिक्षिका, 36 वर्षीय सौम्या पांडे ने कहा कि काश, उन्हें भी एक छात्र के रूप में कक्षाओं में इमर्सिव टेक के साथ सीखने का अवसर मिलता.

यह पूछे जाने पर कि मेटावर्स एडटेक में कैसे बदलाव ला सकता है, पांडे ने कहा कि वह मौजूदा समय में एक ऐप का इस्तेमाल कर रही हैं. इससे छात्र दुनिया के किसी भी हिस्से में विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. उन्होंने बताया, ‘हम मेटावर्स के लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.’

मेटावर्स में शिक्षा का भविष्य

गैर-लाभकारी सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन में एडटेक वर्टिकल के निदेशक गौरी गुप्ता ने कहा कि मेटावर्स गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए जिस गति से वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल किया जा सकता है, वह अनुमान से परे है.

गुप्ता ने दिप्रिंट को बताया, ‘जब हम निम्न-आय वर्ग के लिए शिक्षा तक पहुंच की बात करते हैं, तो दो चीजों पर विचार किया जाना चाहिए – बुनियादी ढांचे और लर्निंग सॉफ्टवेयर की कीमत’

वह कहते हैं, ‘यह देखते हुए कि मेटावर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के लिए किसी स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं है (स्मार्टफोन से मेटावर्स को सीमित रूप में एक्सेस किया जा सकता है). इसलिए यह एक बड़ी बाधा नहीं हो सकती.’

उन्होंने बताया,‘लर्निंग सॉफ्टवेयर की लागत के संबंध में  प्रॉफिट एडटेक कंपनियों को इस इनोवेशन को कम आय वाले क्षेत्रों में लाने में कुछ समय लग सकता है. लेकिन हमें नॉन- प्रॉफिट क्षेत्र में चल रहे इनोवेशन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. और मुझे उम्मीद है कि कई नॉन-प्रॉफिट एडटेक प्लेटफॉर्म पहले से ही इस बारे में सोच रहे होंगे.’

गुप्ता ने कहा, ‘हम सरकारी स्कूलों में प्रासंगिक तकनीकी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाने पर विचार करेंगे. क्योंकि एनईपी शिक्षा क्षेत्र में तकनीक को अपनाने पर जोर देती है.’

उन्होंने कहा, ‘ मेटावर्स के जरिए बच्चों के लिए कोलैबोरेशन, पियर-लर्निंग और इमर्सिव एक्पिरिएंसेज पर काम किया जा सकता है. इससे यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद रहेगा, जिनके लिए आर्थिक बाधाओं के चलते इन तक अपनी पहुंचना बनाना मुश्किल है’

प्रो. आर. गोविंदा, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ एजुकेशनल प्लानिंग के पूर्व कुलपति का मानना है कि एडटेक बूम एक ‘बुलबुला’ है और यह उन खास लोगों तक ही पहुंच पाएगी जो पहले से ही इससे जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.

गोविंदा ने दिप्रिंट को बताया,‘एडटेक स्पेस बाजार से जुड़े हैं और केवल एक विशिष्ट आबादी तक ही इसकी पहुंच है. यह तकनीक चाक और बोर्ड की तरह कभी नहीं बन सकती है जो सबके लिए समान रूप से उपलब्ध है. नई तकनीक ऐतिहासिक रूप से हमेशा खुद को महान क्षमता के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन यह वास्तव में धीरे-धीरे कमजोर होकर खत्म हो जाती है. और यह तब तक होता रहेगा जब तक कि तकनीक सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं हो जाती.’

उन्होंने कहा, ‘हालांकि वह इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ हैं कि 3-डी लर्निंग यानी मेटावर्स में जबरदस्त क्षमता है. अगर उच्च शिक्षा में विज्ञान की अवधारणाओं को इस तरह के ऑडियो-विजुअल तरीके से पढ़ाया जाता है, तो छात्रों को बहुत फायदा होगा.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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