Saturday, 21 May, 2022
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वायु प्रदूषण के मुद्दे पर SC सख्त, सरकार से कहा- उद्योग, गाड़ी और पॉवर प्लांट्स पर करें कड़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे कल तक इस बारे में सारी जानकारी दें कि प्रदूषण को कम करने के लिए कौन सी इंडस्ट्रीज़ बंद की जा सकती हैं, कौन से वाहनों को आवागमन से रोका जा सकता है और कौन से पावर प्लांट को बंद किया जा सकता है और उसके स्थान पर कैसे वैकल्पिक व्यवस्था को बनाया जा सकता है.

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नई दिल्लीः दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इससे निपटने के लिए आप क्या बड़े कदम उठाने का प्रस्ताव रखते हैं. केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दिल्ली और उत्तरी राज्यों में पराली जलाने के कारण सिर्फ 10 फीसदी वायु प्रदूषण होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे कल तक इस बारे में सारी जानकारी दें कि प्रदूषण को कम करने के लिए कौन सी इंडस्ट्रीज़ बंद की जा सकती हैं, कौन से वाहनों को आवागमन से रोका जा सकता है और कौन से पावर प्लांट को बंद किया जा सकता है और उसके स्थान पर कैसे वैकल्पिक व्यवस्था को बनाया जा सकता है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘वायु प्रदूषण में पराली जलाए जाने का योगदान मात्र चार प्रतिशत है, ऐसे में इसे लेकर हल्ला मचाने का कोई आधार नहीं है. निगमों को जिम्मेदार ठहराने पर कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई और कहा कि झूठे बहाने उसे प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नारों पर खर्च और कमाई की लेखा परीक्षा कराने पर मजबूत करेंगे.’

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण की अगुवाई वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब और दिल्ली के संबंधित सचिवों को अदालत की तरफ से बनाई गई समिति के समक्ष अपने प्रतिवेदन देने के लिए बैठक में भाग लेने का निर्देश दिया. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत भी इस पीठ में शामिल थे.

पीठ ने कहा, ‘प्रतिवादियों के शपथ पत्र दाखिल करने और सुनवाई के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि प्रदूषण बढ़ने के लिए कुछ हिस्सों में पराली जलाए जाने के अलावा निर्माण गतिविधियां, उद्योग, परिवहन, ऊर्जा और वाहनों की आवाजाही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम द्वारा कुछ निर्णय किए गए हैं, लेकिन इसने सटीक तरीके से यह नहीं बताया है कि वे वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार कारकों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाने जा रहे हैं.’

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को फैलाने में ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और वाहन ट्रैफिक के साथ पराली जलाना काफी जिम्मेदार हैं. साथ ही केंद्र को कॉन्सट्रक्शन, गैर जरूरी ट्रांसपोर्ट, पावर प्लांट इत्यादि से संबंधित इमरजेंसी मीटिंग बुलाने का निर्देश दिया है.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम पर भी विचार करने को कहा है.


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