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Friday, 1 May, 2026
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न्यायालय ने पीसीपीएनडीटी कानून के प्रभावी कार्यान्वयन की याचिका पर राज्यों से जवाब मांगा

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नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के प्रावधानों और संबंधित नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सभी राज्यों से जवाब मांगा।

पीसीपीएनडीटी कानून भ्रूण में लिंग के निर्धारण के लिए प्रसवपूर्व निदान तकनीकों के उपयोग पर रोक लगाने के इरादे से बनाया गया था।

न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की पीठ ने सभी राज्यों को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहा।

याचिकाकर्ता वकील शोभा गुप्ता की तरफ से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि कानून को “शब्दशः” लागू नहीं किया जा रहा है और अधिनियम के तहत अनिवार्य की गई राज्यों में अधिकारियों को नियुक्त करने की आवश्यकता को पूरा नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “इस अदालत ने केवल केंद्र को नोटिस जारी किया है लेकिन राज्य को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। राज्यों को अदालत को यह बताना होगा कि उचित प्राधिकारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है।”

भाषा प्रशांत माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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