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Monday, 10 June, 2024
होमदेशएक और एक्सटेंशन मिला तो सामंत गोयल कुछ दशकों में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले रॉ प्रमुख बन जाएंगे

एक और एक्सटेंशन मिला तो सामंत गोयल कुछ दशकों में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले रॉ प्रमुख बन जाएंगे

सामंत गोयल को यदि एक और सेवा विस्तार नहीं मिला तो उनका कार्यकाल 30 जून को पूरा हो जाएगा. रॉ संस्थापक आर.एन. काओ के अलावा खुफिया एजेंसी के केवल कुछ ही प्रमुख तीन साल से अधिक समय तक इस पद पर रहे हैं.

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नई दिल्ली: रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) प्रमुख सामंत गोयल पिछले चार दशकों में भारतीय खुफिया एजेंसी में सबसे लंबे समय तक सेवाएं देने वाले स्पाईमास्टर बन सकते हैं, बशर्ते सरकार उन्हें अगले महीने एक साल का और सेवा विस्तार दे दें.

उच्च पदस्थ आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि गोयल और इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख अरविंद कुमार दोनों को सेवा का विस्तार दिया गया था, जो इस साल 30 जून को पूरा होगा. लेकिन दोनों को एक और साल उनके पदों पर बरकरार रखा जा सकता है.

रॉ के संस्थापक और दिग्गज खुफिया अधिकारी रामेश्वरनाथ काओ ने 1968 से 1977 तक संगठन के प्रमुख के तौर पर देश के बाहर सक्रिय भारतीय खुफिया एजेंसी के पुनर्निर्माण का जिम्मा संभाला था. 1977 में मात्र 53 वर्ष की उम्र में इस पद पर नियुक्त नौशेरवन फ्रामजी सुनतुक ने पांच साल और दस महीने तक अपनी सेवाएं दी थीं.

दो अन्य रॉ प्रमुख विक्रम सूद और ए.एस. स्याली ने इस पद पर तीन साल से अधिक का कार्यकाल पूरा किया. खुफिया सेवाओं के प्रमुखों के साथ-साथ कुछ अन्य पुलिस संगठनों के प्रमुखों को दो साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है.

हालांकि, सरकारी सूत्रों ने बताया कि रॉ के नेतृत्व के लिए अन्य उम्मीदवारों पर भी विचार किया जा रहा है, और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. संभावित उम्मीदवारों में श्रीधर राव भी शामिल हैं जो सूद की तरह भारतीय डाक सेवा के पूर्व अधिकारी हैं और अभी एविएशन रिसर्च सेंटर के प्रमुख हैं, जो भारतीय सीमाओं से जुड़ी इमेजिंग और गोपनीय संचार जानकारियों को एकत्र करने में लगा एक सुपर-सीक्रेट संगठन है.

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सेवा में वरिष्ठता के आधार पर एक अन्य संभावित उम्मीदवार भी दौड़ में हैं और ये हैं छत्तीसगढ़ कैडर के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी रवि सिन्हा.

रॉ प्रमुख पद के लिए संभावित उम्मीदवारों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक भी शामिल हैं. भारतीय पुलिस सेवा के 1985 बैच के अधिकारी जायसवाल को पिछली गर्मियों में सीबीआई का प्रमुख नियुक्त किया गया था, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो और रॉ दोनों में कई वर्षों तक सेवाएं दे चुके हैं.

सरकारी सूत्रों ने बताया कि रॉ के अंदर ही गोयल के बाद सबसे वरिष्ठ अधिकारी शशि भूषण सिंह तोमर 30 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जो उन्हें इस दावेदारी से बाहर देता है. तोमर इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी 814 में बंधक बनाए गए लोगों में शामिल होने के कारण चर्चित रहे हैं. इस उड़ान को जैश-ए-मोहम्मद ने हाईजैक कर लिया था और विमान को कंधार ले जाया गया था.

गोयल की नियुक्ति से पहले रॉ की अगुआई के लिए दो अन्य संभावित उम्मीदवारों—बेहद प्रतिष्ठित पाकिस्तान मामलों के एक्सपर्ट आर. कुमार और अभिजीत हलदर—के नाम सामने आए थे और ये दोनों अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद के अनुबंध के तहत संगठन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कुमार को आधिकारिक तौर पर रॉ का इतिहास लिखने के लिए जाना जाता है, जबकि हलदर को प्रवासी भारतीयों के बीच प्रचार अभियान चलाने का प्रबंधन सौंपा गया है.

विदेशी खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों की तुलना में भारत में इस पद के लिए निर्धारित कार्यकाल अपेक्षाकृत काफी कम है. ब्रिटिश सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस—जो कि एमआई6 के नाम से लोकप्रिय है—के प्रमुख को आम तौर पर पांच साल या उससे अधिक समय के लिए यह पदभार मिलता है, और उन्हें अक्सर 50वें दशक की शुरुआता वाली उम्र में भर्ती किया जाता है. केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) के प्रमुख को सामन्यत: राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि के दौरान यह जिम्मेदारी मिलती हैं, और वे पेशेवर खुफिया अधिकारियों के बजाये अक्सर राजनयिक होते हैं.

लंबे कार्यकाल की वकालत करने वालों का तर्क है कि इससे भारतीय खुफिया प्रमुखों को प्रौद्योगिकीविदों और भाषा विशेषज्ञों की भर्ती सहित कई अहम सुधारों को लागू करने का मौका मिलेगा, जिन क्षेत्रों में रॉ कमजोर साबित होती है. संगठन का कार्यकारी नेतृत्व मुख्यत: भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संभालते हैं, जिन्हें खुफिया सेवाओं से जुड़ा छह महीने का क्रैश कोर्स कराया जाता है.

खुफिया एजेंसी के अभियान और विवाद

पंजाब में अपनी सेवाएं देने वाले भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी और 2012 में रॉ के लंदन स्टेशन का नेतृत्व संभालने वाले गोयल के बारे में माना जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान स्थित जिहादी समूहों के साथ-साथ खालिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ एकदम नाटकीय ढंग से आक्रामक अभियानों की अगुआई की है. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन माना जाता है कि इनमें 2021 एक ऑपरेशन शामिल है जिसमें खुफिया एजेंसी लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज मुहम्मद सईद के सफाये के एकदम करीब पहुंच गई थी.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रॉ चीन के बारे में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए अपनी क्षमताएं बढ़ाने की भी कोशिश कर रही है, लेकिन सीमित पूल के कारण इस प्रक्रिया में विशेषज्ञता का अभाव है.

हालांकि, संगठन को खुद इन आरोपों का भी सामना करना पड़ा है कि इसने और अन्य भारतीय खुफिया सेवाओं ने पेगासस सर्विलांस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल देश के भीतर असंतुष्टों को निशाना बनाकर किया था. भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी के अपहरण की रॉ की कथित कोशिश को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद उत्पन्न हो गया था.

बतौर प्रमुख गोयल के कार्यकाल के दौरान उनके करीबी सिपहसालारों का एक सर्कल सक्रिय तौर पर काम करता रहा है, जो अपने पूरे कार्यकाल के दौरान प्रमुख पदों पर काम करते रहे हैं. विदेशों में प्रमुख रॉ स्टेशनों में भी अधिकारियों को तीन साल या उससे अधिक समय तक काम करते देखा गया जो कि रॉ की पुरानी व्यवस्था को देखते हुए सामान्य बात नहीं है.
(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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