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Monday, 23 March, 2026
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शबरिमला सोना गबन मामला : एसआईटी नमूने वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए बार्क और अन्य प्रमुख प्रयोगशालाओं को भेजेगा

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कोच्चि, नौ फरवरी (भाषा) प्रसिद्ध शबरिमला मंदिर से कथित तौर पर सोने की हुई चोरी की जांच कर रही एसआईटी ने सोमवार को केरल उच्च न्यायालय को सूचित किया कि पहाड़ी मंदिर से एकत्र की गई कलाकृतियों के नमूनों को वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए मुंबई स्थित बार्क सहित इसमें पारंगत एजेंसियों को भेजा जाएगा।

मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की ओर से यह दलील तब दी गई जब न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की पीठ ने जांच की प्रगति की समीक्षा की।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि द्वारपालक (संरक्षक देवता) की प्रतिमाओं पर मढ़ी गई सोने की परतों से सोने की चोरी के मामले में चार अतिरिक्त व्यक्तियों की भूमिकाओं की जांच की गई और उनमें से दो की संलिप्तता की पुष्टि हुई है।

अदालत में पेश यथा स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक इसी प्रकार, श्रीकोविल (गर्भगृह) की चौखट से सोना चोरी होने के मामले में दो व्यक्तियों की भूमिका की जांच की गई और उनमें से एक की संलिप्तता की पुष्टि हुई।

एसआईटी ने दलील दी कि स्वर्ण परत के संयोजन में बदलाव के स्तर, धातुकर्म संबंधी हेरफेर की प्रकृति और मूल रूप से मौजूद सोने की मात्रा तथा बाद में कम हुई मात्रा को सटीकता और वस्तुनिष्ठता के साथ स्थापित करने के लिए उन्नत वैज्ञानिक विश्लेषण अपरिहार्य है।

रिपोर्ट में कहा गया कि सतह की मौलिक संरचना का निर्धारण करने के लिए एक्स-रे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एक्सआरएफ), अति सूक्ष्म अशुद्धियों और मौलिक प्रोफाइलिंग के लिए इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (आईसीपी-एमएस), और मिश्र धातु संरचना और धातुकर्म एकरूपता का विश्लेषण करने के लिए ऑप्टिकल उत्सर्जन स्पेक्ट्रोस्कोपी (ओईएस) कराने का प्रस्ताव है।

अदालत ने टिप्पणी की कि इन तकनीकों से मूल रूप से वहां लगाई गई स्वर्ण परतों और वर्तमान में लगाए गए परतों के बीच तुलना करना संभव होगा।

अदालत ने कहा कि इन जांच के लिए आवश्यक उन्नत विश्लेषणात्मक सुविधाएं राज्य में स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में उपलब्ध नहीं हैं, जहां शुरू में नमूने भेजे गए थे।

अदालत ने रेखांकित किया, ‘‘इसलिए एसआईटी इन विशेष जांच के लिए मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क), झारखंड के जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला और हैदराबाद स्थित रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला सहित प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और प्रयोगशालाओं से संपर्क कर रही है।’’

भाषा

धीरज प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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