तिरुवनंतपुरम, 30 जनवरी (भाषा) केरल में सत्तारूढ़ वाम दल और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने मंगलवार को राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विधानसभा में एक-दूसरे पर निशाना साधा। विपक्षी सदस्यों ने राज्य की दुर्दशा को सुधारने के लिये सरकार पर कोई भी योजना न होने का आरोप लगाते हुए अंतत: सदन से बहिर्गमन किया।
राज्य के वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने यूडीएफ के दावों के विपरीत सरकार की ओर से किसी भी तरह के कुप्रबंधन या फिजूलखर्ची से इनकार किया और केरल के आर्थिक संकट के लिए सीधे तौर पर केंद्र की नीतियों और केरल के प्रति उपेक्षा को जिम्मेदार ठहराया।
दूसरी ओर, सुबह सदन में कार्यस्थगन का नोटिस देने वाले विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा विपक्ष ने आरोप लगाया कि वाम सरकार कर प्रशासन और संग्रह में विफल रही है और यह राज्य के वित्तीय संकट के मुख्य कारणों में से एक है।
आरोपों से इनकार करते हुए, सरकार ने तर्क दिया कि राज्य का कामकाज बाधित होने के विपक्ष के दावे झूठे हैं और केरल ने वित्तीय संकट के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं में विकास किया है।
इससे पहले दिन में यूडीएफ ने कार्यस्थगन नोटिस में आरोप लगाया था कि वामपंथी सरकार के कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची के कारण राज्य में वित्तीय समस्याएं खड़ी हुई हैं।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सदन के निर्धारित कामकाज को निलंबित करने और मुद्दे पर चर्चा करने के लिए विपक्ष द्वारा दिए गए स्थगन नोटिस का स्वागत किया।
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष वी.डी. सतीसन ने प्रदेश के वित्त मंत्री बालगोपाल से मुखातिब होते हुए कहा, “वित्त मंत्री जी, आप बुरी तरह विफल रहे हैं। अब भी अपने कर संग्रह को बेहतर करने की कोशिश कर लीजिए।”
आरोपों को खारिज करते हुए बालगोपाल ने कहा कि राज्य का कामकाज ठप नहीं हुआ है, जैसा विपक्ष जताने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि विपक्षी सदस्य बालगोपाल के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और सदन से बहिर्गमन कर गए।
इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमसीर ने फैसला सुनाया कि कार्यस्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है।
भाषा प्रशांत वैभव
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