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Thursday, 12 March, 2026
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उत्तर पुस्तिका निरीक्षण संबंधी नियम असंवैधानिक, अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिका के निरीक्षण की अनुमति

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नैनीताल, 11 मार्च (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा से जुड़े उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसके तहत उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही करने की अनुमति दी जाती थी।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अतिरिक्त निजी सचिव (एपीएस) पद पर भर्ती के लिए आयोजित ‘शॉर्टहैंड’ परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने असफल उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने का अधिकार प्रदान किया।

खंडपीठ ने आदेश में कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता व निष्पक्षता संवैधानिक रूप से अनिवार्य हैं और उम्मीदवारों को मूल्यांकन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता।

राजवीर सिंह, रणवीर सिंह तोमर, रुचि राणा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने तीन फरवरी 2026 को घोषित ‘शॉर्टहैंड’ परीक्षा के परिणाम को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आयोग ने उन्हें उनकी ‘शॉर्टहैंड’ नोटबुक और टाइप की गई उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी, जिससे मूल्यांकन की शुद्धता की पुष्टि करना संभव नहीं हो सका।

देहरादून स्थित सचिवालय और हरिद्वार स्थित उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में अतिरिक्त निजी सचिव के 99 पदों पर भर्ती के लिए 18 जुलाई 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था।

चयन प्रक्रिया के पहले चरण में हिंदी व अंग्रेजी टाइपिंग, कंप्यूटर ज्ञान और शॉर्टहैंड जैसे कौशल परीक्षण शामिल थे।

इस चरण में सफल होने वाले अभ्यर्थी ही दूसरे चरण की लिखित परीक्षा में शामिल होने के पात्र थे।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के पहले चरण की अन्य परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली थीं और ‘शॉर्टहैंड’ परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया था, इसके बावजूद उन्हें परिणाम में चयनित नहीं किया गया।

इस कारण मूल्यांकन में संभावित त्रुटियों के संदेह के आधार पर उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।

आयोग द्वारा जारी ‘नोट-चार’ के अनुसार, अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण की अनुमति दी जा सकती थी।

अदालत ने असफल उम्मीदवारों के संदर्भ में इस प्रावधान को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि अगर निरीक्षण में अत्यधिक देरी होती है तो बाद में किसी भी त्रुटि को सुधारना लगभग असंभव हो जाएगा और इससे उम्मीदवारों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना की श्रेणी में आती है और उम्मीदवार को उसका निरीक्षण करने तथा उसकी प्रति प्राप्त करने का अधिकार है।

अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित ‘नोट-चार’ को उस सीमा तक निरस्त माना जाए, जहां तक वह असफल उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने से रोकता है।

अदालत ने साथ ही निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अपनी ‘शॉर्टहैंड’ नोटबुक और उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने तथा उनकी प्रतियां प्राप्त करने की अनुमति दी जाए।

भाषा सं दीप्ति जितेंद्र

जितेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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