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Friday, 6 March, 2026
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जम्मू कश्मीर विधानसभा में हंगामा; विपक्षी सदस्यों ने जम्मू में एनएलयू की स्थापना की मांग उठाई

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जम्मू, तीन फरवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को उस समय हंगामा हुआ जब विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू के लिए एक राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) की मांग उठाई और नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने केंद्र शासित प्रदेश के बाहर कश्मीरियों के कथित उत्पीड़न की घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।

विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने हंगामे के बावजूद प्रश्नकाल जारी रखा और देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरियों के खिलाफ हुई ‘‘घृणा अपराध’’ की घटनाओं पर चर्चा करने के लिए पीडीपी विधायक वहीद उर रहमान पारा द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक सुरजीत सिंह सलाथिया ने जम्मू विश्वविद्यालय के उन छात्रों का मुद्दा उठाया जो कानून विश्वविद्यालय की मांग के समर्थन में सड़कों पर उतरे हुए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम कश्मीर के लिए एनएलयू प्रदान करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम जम्मू के लिए भी ऐसा ही एक विश्वविद्यालय चाहते हैं ताकि इस क्षेत्र के छात्रों की मांग पूरी हो सके।’’

सलाथिया जब अपनी बात रख रहे थे तब भाजपा के अन्य विधायकों ने भी उनकी मांग के समर्थन में खड़े हो कर तख्तियां दिखाईं तथा ‘‘जम्मू के लिए एनएलयू’’ जैसे नारे लगाए।

कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने तख्तियों के प्रदर्शन पर आपत्ति जताई और कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की हालिया बैठक में किसी भी मुद्दे को उठाते समय सदन की मर्यादा बनाए रखने का निर्णय लिया गया था।

हंगामे के बीच, नेकां के विधायक मुबारक गुल ने आरोप लगाया कि कश्मीरी छात्रों और व्यापारियों को देश के विभिन्न हिस्सों में उत्पीड़न और मारपीट का सामना करना पड़ रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।

पारा ने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि उन्होंने कश्मीरी छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ ‘‘घृणा अपराध’’ की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।

नेकां विधायक सैफुल्लाह मीर ने आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश के बाहर रहने वाले कई कश्मीरियों को उनके आवासों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है और बाहर आने पर उन पर हमला किया जा रहा है, जिसके लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘स्थगन प्रस्ताव का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उठाए गए मुद्दों को प्रश्नकाल को बाधित किए बिना उचित तरीके से अन्य माध्यमों से उठाया जा सकता है…।’’

भाषा यासिर सिम्मी

सिम्मी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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