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Thursday, 23 April, 2026
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आरएसएस नोटिस : सतीशन बोले-गोलवलकर की किताब को लेकर अपने बयान पर कायम हूं

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कोच्चि, नौ जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने शनिवार को कहा कि वह अपने उस बयान पर कायम हैं कि राज्य के पूर्व मंत्री साजी चेरियन द्वारा संविधान के खिलाफ की गई विवादास्पद टिप्पणी उस किताब में मौजूद सामग्री से मिलती-जुलती थी, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक एम एस गोलवलकर ने लिखा था।

सतीशन ने कहा कि वह अपने इस बयान के लिए किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं।

कोच्चि में मीडिया से मुखातिब सतीशन आरएसएस के राज्य नेतृत्व द्वारा उन्हें उस बयान को लेकर भेजे गए कथित कानूनी नोटिस से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसके तहत उन्होंने था कि चेरियन की संविधान विरोधी टिप्पणी गोलवलकर की किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ में मौजूद सामग्री के समान थी।

कांग्रेस नेता सतीशन ने कहा कि यह नोटिस ‘अवमानना के लायक’ है और वह इसे पूरी तरह से अस्वीकार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं इसे लेकर किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हूं। मैंने पुस्तक की पृष्ठ संख्या का हवाला देते हुए बयान दिया।”

सतीशन ने आरोप लगाया कि संविधान के प्रति आरएसएस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्य सचिवालय सदस्य चेरियन का दृष्टिकोण एक समान है।

मीडिया में प्रकाशित खबरों के मुताबिक, आरएसएस ने सतीशन को कानूनी नोटिस भेजकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि गोलवलकर ने अपनी किताब में यह टिप्पणी कहां की है।

संवाददाताओं से बातचीत में सतीशन ने मंत्री पद से इस्तीफा देने के चेरियन के फैसले को लेकर उनकी ‘तारीफ करने’ के लिए माकपा के राज्य सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन की आलोचना भी की।

कांग्रेस नेता ने कहा कि चेरियन ने संविधान के खिलाफ अपनी विवादास्पद टिप्पणी अभी तक वापस नहीं ली है, लेकिन बालाकृष्णन ने कहा कि विवाद शुरू होने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देकर लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखा है।

सतीशन ने यह भी कहा कि केरल में सत्तारूढ़ माकपा को चेरियन से यह स्वीकार करने के लिए कहना चाहिए था कि उन्होंने संविधान के बारे में जो कहा, वह गलत था।

चेरियन ने बुधवार को संविधान के खिलाफ उनकी विवादास्पद टिप्पणी को लेकर जारी हंगामे और विपक्ष सहित विभिन्न तबकों द्वारा की जा रही आलोचना के बीच मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।

पथनमथिट्टा में हाल ही में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम में चेरियन ने आरोप लगाया था कि संविधान ‘शोषण की अनदेखी करता है’ और यह इस तरह से बनाया गया है कि लोगों को ‘लूटा’ जा सके।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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