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Friday, 10 April, 2026
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आरएसएस इतिहास की किताबों में सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराना नहीं चाहता : भागवत

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(तस्वीरों के साथ)

नागपुर, आठ अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि आरएसएस यह नहीं चाहता कि इतिहास में उसका नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाए, बल्कि वह पिछले 100 वर्षों में किए गए अपने कार्यों का पूरा श्रेय समाज को देना चाहता है।

भागवत ने कहा कि आरएसएस का पूरा काम स्वयंसेवकों की कड़ी मेहनत पर आधारित है, न कि किसी की कृपा पर। उन्होंने कहा कि इस हिंदुत्व संगठन के काम में किसी की अनदेखी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

भागवत नागपुर के रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस के ‘घोष पाठक’ के इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘राष्ट्र स्वराधना’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।

संघ प्रमुख ने कहा कि सभी स्वयंसेवकों ने आरएसएस की विचारधारा के अनुरूप राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। उन्होंने कहा कि संघ ने पूरे समाज के योगदान के आधार पर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का विकल्प चुना है।

भाषा पारुल राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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