(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में रोटावायरस टीका परीक्षण में शामिल लोगों के आंकड़े नहीं रखने का दावा करने पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) से नाराजगी जताई।
आरटीआई आवेदन में परीक्षण परिणामों के सांख्यिकीय विवरण, जिसमें आंत्र अवरोध (एक ऐसी स्थिति जहां आंत का एक हिस्सा दूसरे में खिसक जाता है, जिससे रुकावट पैदा होती है) के मामले शामिल हैं, देने का अनुरोध किया गया था।
सीआईसी ने आरटीआई याचिका के निस्तारण को ‘लापरवाहीपूर्ण’ करार दिया। इसी के साथ आईसीएमआर को अभिलेखों की नए सिरे से खोज करने और यदि वे नहीं मिलते हैं तो उनकी अनुपलब्धता की पुष्टि करते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता अमृता जौहरी द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से संबंधित है, जिसमें सरकारी द्वारा वित्त पोषित और भारत की क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री में पंजीकृत रोटावायरस के 116ई स्ट्रेन के नैदानिक परीक्षण का विवरण मांगा गया।
आवेदक ने तमिलनाडु के वेल्लोर में टीका और प्रायोगिक औषधि प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या और दो साल की अध्ययन अवधि के दौरान दर्ज किए गए आंत्र अवरोध के मामलों की जानकारी मुहैया कराने का अनुरोध किया था।
सूचना आयुक्त जया वर्मा सिन्हा ने सुनवाई के दौरान पाया कि न तो केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) और न ही प्रथम अपीलीय प्राधिकरण ने आरटीआई अधिनियम के तहत निर्धारित समय के भीतर कोई जवाब दिया।
सीआईसी ने अपने आदेश में कहा, ‘‘आयोग ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने, दोनों पक्षों को सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर न तो सीपीआईओ और न ही प्रथम अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपीलकर्ता को कोई उत्तर दिया गया है। अतः आयोग सीपीआईओ और एफएए दोनों के इस मामले को लापरवाही से लेने के आचरण पर असंतोष व्यक्त करता है।’’
आईसीएमआर ने हालांकि, अपने लिखित जवाब में कहा कि क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्री-भारत (सीटीआरआई) परीक्षण प्रोटोकॉल और कार्यप्रणाली संबंधी विवरण रखती है, लेकिन प्रतिभागी-स्तर के आंकड़े नहीं रखती है। उसने कहा कि ‘‘प्रतिभागी के आंकड़े सीटीआरआई में नहीं रखे जाते हैं और इसलिए प्रश्न सीटीआरआई के लिए प्रासंगिक नहीं हैं’’।
आयोग ने इस दलील पर संज्ञान लेते हुए सीपीआईओ को निर्देश दिया कि वह संबंधित अभिलेखों का पता लगाने की कोशिश करें और यदि उपलब्ध हो तो तीन सप्ताह के भीतर जानकारी प्रदान करें।
उसने कहा, ‘‘यदि संबंधित दस्तावेज नहीं मिलते, तो सीपीआईओ को गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर एक उपयुक्त हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाता है, जिसमें संबंधित रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के तथ्य को दर्ज किया गया हो।’’
जोहरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्होंने परीक्षण के परिणामों का विवरण मांगा था, ‘‘विशेष रूप से आंतों में रुकावट के जोखिम की घटना’’ को लेकर, लेकिन उन्हें आरटीआई आवेदन या पहली अपील का कोई जवाब नहीं मिला।
भाषा धीरज वैभव
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