नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि सड़क दुर्घटना के किसी पीड़ित को पहुंचे मानसिक व शारीरिक नुकसान की भरपाई पैसों से नहीं की जा सकती, लेकिन उचित मुआवजे की अदायगी के अलावा क्षतिपूर्ति के लिए कोई अन्य तरीका नहीं है।
शीर्ष न्यायालय ने पांच साल के एक बच्चे के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाते हुए यह कहा।
न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन की पीठ ने लड़के को मुआवजे की राशि बढ़ा कर ब्याज सहित 49.93 लाख रुपये कर दी।
पीठ ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत चोट के मामलों में नुकसान का निर्धारण आसान नहीं है। मानसिक एवं शारीरिक नुकसान की भरपाई पैसों से नहीं हो सकती, लेकिन पीड़ित को उचित मुआवजे की अदायगी के साथ क्षतिपूर्ति करने के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं है। ’’
शीर्ष न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए यह कहा। दरअसल, उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा सुनाये गये मुआवजे की राशि 18.24 लाख रुपये को घटा कर 13.46 लाख रुपये कर दिया था।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक यह लड़का (अपने दोनों पैरों के सहारे) चलने फिरने में असमर्थ हो गया है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘हमने पाया कि उसकी शारीरिक स्थिति के मद्देनजर उसे शेष जीवन के लिए एक तीमारदार की जरूरत पड़ेगी। याचिकाकर्ता ने न सिर्फ अपना बचपन, बल्कि अपना यौवन भी खो दिया। इसलिए विवाह होने की संभावना खत्म हो जाने को लेकर भी उसे क्षतिपूर्ति करने की जरूरत होगी।’’
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