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Monday, 30 March, 2026
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चयन प्रक्रिया के बाद आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता: उत्तराखंड उच्च न्यायालय

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नैनीताल, 26 फरवरी (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा कि चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का दावा नहीं करने वाला उम्मीदवार बाद में इसके लाभ से वंचित किए जाने की शिकायत नहीं कर सकता।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने सहायक शिक्षक (प्राथमिक), विज्ञान के पद पर भर्ती प्रक्रिया में हुए चयन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी ।

न्यायालय ने पाया कि उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को दिए गए क्षैतिज आरक्षण के तहत की गई नियुक्ति में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है ।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सहायक शिक्षक (प्राथमिक) के पद के लिए चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। उसने दलील दी कि विज्ञान विषय में चंपावत जिले के लिए चयनित उम्मीदवार को उससे कम अंक प्राप्त करने के बावजूद नियुक्त कर दिया गया ।

याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ता ने 28 जनवरी, 2026 को प्रकाशित चयन सूची को रद्द करने, प्रतिवादी की नियुक्ति को निरस्त करने और उसे उसकी योग्यता के आधार पर नियुक्त करने का निर्देश देने की प्रार्थना की ।

राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि चयनित उम्मीदवार ने राज्य आंदोलनकारी योजना का लाभ उठाया था। इस प्रावधान के तहत उत्तराखंड राज्य के आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को राज्य सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाता है, जिसके अंतर्गत नियुक्ति की गई थी।

भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि सरकारी आदेशों के अनुसार क्षैतिज आरक्षण लागू होगा।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह स्वयं राज्य आंदोलनकारी श्रेणी से संबंधित है, लेकिन उसने चयन प्रक्रिया के दौरान इस लाभ का दावा नहीं किया था।

अदालत ने फैसला सुनाया कि संबंधित स्तर पर आरक्षण का दावा किए बिना कोई उम्मीदवार इसका लाभ न मिलने की शिकायत बाद में नहीं कर सकता है ।

उसने गया कि चूंकि प्रतिवादी को एक अलग आरक्षित श्रेणी के तहत नियुक्त किया गया था, इसलिए उसकी योग्यता की तुलना सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार की योग्यता से नहीं की जा सकती।

भाषा सं दीप्ति सिम्मी

सिम्मी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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