Thursday, 20 January, 2022
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‘देसी ट्विटर’ कू पर रिपब्लिक टीवी का जिक्र सबसे ज्यादा, मोदी के मंत्री भी टॉप-10 में : अध्ययन

अर्णब गोस्वामी के नेटवर्क की कू के साथ ‘संपादकीय साझेदारी’ है और इसका हिंदी चैनल रिपब्लिक भारत स्वदेशी सोशल साइट पर मोस्ट मेंशन्ड यूजर के मामले में चौथे स्थान पर है.

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नई दिल्ली: अर्णब गोस्वामी की अगुवाई वाला न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी एक सोशल मीडिया एप कू, जिसे अमेरिकी माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है, पर सबसे अधिक मेंशन किए गए यूजर की सूची में टॉप पर है. भारतीय शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है.

‘कू : द न्यू किंग? भारत के उभरते सोशल नेटवर्क की विशिष्टता’ शीर्षक वाला यह अध्ययन दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, और हैदराबाद के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने किया था. यह 31 मार्च को एक प्री-प्रिंट पोर्टल आर्काइव (arXiv) पर प्रकाशित किया गया था जिसमें नॉन पीर रिव्यूड रिसर्च अकादमिक समुदाय के साथ साझा की जाती हैं.

रिपब्लिक नेटवर्क की कू ऐप के साथ एक संपादकीय साझेदारी भी है, जिसमें कथित तौर पर इस मंच के जरिये डेली हैशटैग ट्रेंड कराने और फॉलोअर्स को अन्य चीजों के अलावा इन टॉपिक से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने में नेटवर्क के हिंदी चैनल रिपब्लिक भारत का इस्तेमाल किया जा रहा है.

अध्ययन में बताया गया है कि रिपब्लिक भारत सबसे ज्यादा मेंशन किए गए यूजर की सूची में चौथे नंबर है और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और पीयूष गोयल भी इस टॉप-10 सूची में शामिल हैं. सूची में भाजपा नेता संबित पात्रा शामिल हैं तो ‘किसान एकता मोर्चा’ (मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों का एक समूह) को भी जगह मिली है.

शोधकर्ताओं ने ‘कू के यूजर्स, नेटवर्क डायनमिक्स और इसके कंटेंट का विश्लेषण’ करते हुए एप, जिसकी यूजर संख्या 47 लाख (16 मार्च तक) पार कर चुकी है, के बारे में अध्ययन की कोशिश की. उनका उद्देश्य ‘इसकी यूजर डेमोग्राफी और कंटेट’ से लेकर, ‘यूजर के पहले डाटासेट, उनके कनेक्शन और कंटेंट’ और इस ‘बहुभाषी मंच पर बने नेटवर्क और कम्युनिटीज’ का अध्ययन करके इस एप की व्यापक विशिष्टताओं का पता लगाना था.

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कू है क्या?

मार्च 2020 में लॉन्च कू एक अन्य माइक्रोब्लॉगिंग साइट है जो सीमित शब्दों में सोशल मीडिया पोस्ट की सुविधा देती है. ट्विटर पर 280 शब्द के ट्वीट के मुकाबले इस पोर्टल पर कोई यूजर एक ‘कू’, इस पर की जाने वाली पोस्ट को यही कहा जाता है, में अधिकतम 400 शब्द लिख सकता है.

दोनों प्लेटफार्म एक ही तरीके से काम करते हैं—यूजर्स को मैसेज शेयर करने, उन्हें उनके फीड में शो करना और कुछ अकाउंट को फॉलो करने की सुविधा देना—लेकिन कू कई भारतीय भाषाओं जैसे हिंदी, कन्नड़, तेलुगु और मराठी का इस्तेमाल करके अपनी एक अलग पहचान बनाने में जुटा है,

अगस्त 2020 में अप्रमेय राधाकृष्ण और मयंक बिदावतका की बनाई यह एप नरेंद्र मोदी सरकार के ‘डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर भारत एप इनोवेट चैलेंज’ के विजेताओं में एक रही थी.


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यूजर संख्या बढ़ी

इस साल के शुरू में किसान आंदोलन चरम पर होने के दौरान और खासकर दिल्ली में 26 जनवरी की घटना के बीच ऐसे कुछ अकाउंट ब्लॉक किए जाने को लेकर, जिनके बारे किसानों का कहना था कि भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं, ट्विटर और मोदी सरकार के गतिरोध कायम होने के बीच कू को भारी लोकप्रियता मिली थी.

अभी तक रिपब्लिक टीवी, गोयल और प्रसाद की अगुवाई वाले आईटी मंत्रालय की तरफ से एप को डिस्कस या मेंशन किया जाता रहा है. अध्ययन के मुताबिक, कू के यूजर बेस में सबसे ज्यादा उछाल तब आया था जब आईटी मंत्रालय ने इसके बारे में ट्वीट किया था.

अध्ययन में बताया गया कि 10 फरवरी 2021 के आसपास लगभग 200,000 यूजर ने इस एप पर साइन अप किया था, जब भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके बारे में ट्वीट पर जानकारी दी थी.

दिप्रिंट ने कू के को-फाउंडर राधाकृष्ण को एक ईमेल भेजकर इसके कुल यूजर संबंधी ताजा आंकड़ों की जानकारी मांगी थी लेकिन यह रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी. हालांकि, 10 फरवरी को भेजे गए एक ईमेल के जवाब में राधाकृष्ण ने बताया था कि कू को डाउनलोड वालों का आंकड़ा 30 लाख के पार पहुंच चुका है.

उन्होंने बताया था, ‘हम सामान्य दिनों की तुलना में 10 गुना ज्यादा डाउनलोड देख रहे हैं. पिछले 48 घंटों में हमने कू पर अब तक सबसे ज्यादा यूजर देखे हैं.’

अध्ययन के मुताबिक, 2021 के पहले दो महीनों में 19 लाख यूजर कू पर आए थे.

अध्ययन में शामिल इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के प्रो. पोन्नुरंगम कुमारगुरु ने दिप्रिंट को ईमेल पर बताया कि फरवरी के तीन दिनों में तीन लाख से अधिक यूजर इस एप पर आए—8 फरवरी को 37,195 यूजर, 9 फरवरी को 81,721 और 10 फरवरी को 2,15,477 ने इसे ज्वाइन किया. उन्होंने बताया कि एक सामान्य दिन में 9,500 नए यूजर कू से जुड़ते हैं.

8 फरवरी, 9 फरवरी और 10 फरवरी को रिपब्लिक नेटवर्क के संस्थापक अर्णब गोस्वामी ने ‘भारतीय सोशल मीडिया’ और ‘कू यूजर्स’ विषय के संदर्भ में अपने शो पर इस एप के बारे में चर्चा की थी.

9 फरवरी को गोयल ने ट्वीट किया कि उन्होंने कू ज्वाइन किया है, इसके एक दिन बाद आईटी मंत्रालय ने ट्वीट किया.

 

भाजपा से जुड़े हैशटैग

हालांकि, ट्विटर के साथ गतिरोध के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं ने कू की तरफ रुख करके इसे शीर्ष पर पहुंचा दिया लेकिन कू की तरफ से किसी का पक्ष लेने के दावों को खारिज कर दिया गया है. बहरहाल, अध्ययन बताया है कि इसमें भाजपा से जुड़े हैशटैग हावी हैं.

शोधकर्ताओं ने कहा, ‘हमें इस पर ‘#kooforindia’, ‘#bantwitter ’, और ‘#koovstwitter’ जैसे हैशटैग दिखते हैं जो यह ट्विटर और कू के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना और कू प्लेटफॉर्म को प्रोमोट करने की कोशिशों को दर्शाते हैं. इसके अलावा भाजपा से जुड़े ‘#indiawithmodi ’, ‘#atmanirbharbharat’, ‘#modi’, ‘#modistrikesback’ और ‘#bjp’ जैसे हैशटैग भी मौजूद हैं. हमें इस पर हिंदुओं पर केंद्रित शब्द ‘जयश्रीराम’ और ‘राम-राम’ भी काफी ज्यादा नजर आए.’

मार्च में बिजनेस टुडे से बात करते हुए एक अन्य को-फाउंडर बिदावतका ने कहा था कि सरकार एप को शुरुआती तौर पर अपनाने वालों में शामिल है, क्योंकि वह आत्मनिर्भरता के उपायों के महत्व को समझती है. उन्होंने कहा, ‘इस प्लेटफार्म पर 0.1 फीसदी से भी कम राजनेता है. बहरहाल, मीडिया को जो बात ज्यादा पसंद आती है, वो ये है कि इस पर तमाम राजनेता हैं और वे भाजपा के हैं.’

राधाकृष्ण ने फरवरी में दिप्रिंट को बताया था कि वे ‘हम इस प्लेटफॉर्म पर किसी का भी (उनके) किसी भी विचार के बावजूद स्वागत करते हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि कू सही मायने में भारत को प्रतिबिंबित करे. हमें पूरी उम्मीद है कि कू भारत को एकजुट करने में ऐसे भूमिका निभाएगा जैसी पहली कभी किसी ने नहीं निभाई होगी.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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