नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनकी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद ने बुधवार को टेलीफोन पर बातचीत की और दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को उच्च स्तर तक ले जाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।
इस बातचीत के दौरान अनीता आनंद ने सिंह को कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति और भारत के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने से जुड़े महत्व की जानकारी दी। वहीं रक्षा मंत्री सिंह ने रेखांकित किया कि भारत प्रतिस्पर्धात्मक भूमि और श्रम लागत के साथ एक आकर्षक रक्षा विनिर्माण स्थल है। सिंह ने उन्हें बताया कि कनाडाई रक्षा कंपनियां भारत में सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन पर गौर सकती हैं।
सिंह ने ट्वीट किया, ‘‘कनाडा की रक्षा मंत्री अनिता आनंद के साथ बातचीत करके खुशी हुई। हमने कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति का स्वागत किया। औद्योगिक सहयोग सहित द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को विकसित करने के तरीकों पर बेहतरीन चर्चा हुई। कनाडा की रक्षा कंपनियों को भारत में निवेश और निर्माण के लिए आमंत्रित किया।’
कनाडाई रक्षा मंत्री ने इस वार्ता को ‘सार्थक’ बताया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘आज, मैंने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सार्थक चर्चा की। कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति के जरिए, हम इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं। हमारे लोगों से लोगों के संपर्क और व्यापार संबंधों को धन्यवाद। भारत कनाडा के लिए एक मजबूत भागीदार बना रहेगा।’
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और बढ़ावा देने के तौर-तरीकों पर चर्चा की जो दोनों देशों के लोकतांत्रिक लोकाचार तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा की दृष्टि से साझा हितों को दर्शाता है।
इसमें कहा गया है, ‘‘दोनों मंत्री रक्षा संबंधों को उच्च स्तर तक ले जाने और रक्षा क्षेत्र को भारत-कनाडा द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने के लिए कार्य करने पर सहमत हुए।’’
मंत्रालय ने कहा कि यह बातचीत जोशपूर्ण तथा सौहार्दपूर्ण रही।
बयान के अनुसार, ‘‘अनीता आनंद ने रक्षा मंत्री सिंह को कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति और भारत के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने से जुड़े महत्व के बारे में जानकारी दी। सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कनाडा की नौसेना की उपस्थिति में विस्तार का स्वागत किया। दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के संभावित क्षेत्रों – विशेषकर संयुक्त राष्ट्र शांति प्रशिक्षण से लेकर रक्षा औद्योगिक सहभागिता तक पर चर्चा की।’’
भाषा अविनाश माधव
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