जोधपुर, 19 मार्च (भाषा) जोधपुर की एक पारिवारिक अदालत ने बृहस्पतिवार को आदेश पारित कर 21 वर्षीय महिला के विवाह को रद्द कर दिया। महिला की शादी 12 साल की उम्र में कर दी गई थी।
अदालत ने अपने आदेश में बाल विवाह के कारण बच्चों के वर्तमान और भविष्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सामाजिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
महिला की शादी 2016 में जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके में सामाजिक दबाव के चलते कर दी गई थी। कुछ साल बाद, जब उसके ससुराल वालों ने ‘गौना’ (विवाह के बाद पहली बार अपने पति के घर (ससुराल) विदा करना और वास्तविक वैवाहिक जीवन की शुरुआत करना) के लिए दबाव डालना शुरू किया तो उसे कथित रूप से मानसिक परेशानी होने लगी।
लगभग 18 महीने पहले उसने विवाह रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की। पारिवारिक अदालत में एक याचिका दायर कर विवाह की वैधता को चुनौती दी गई, जो उसकी सहमति के बिना तब संपन्न हुई थी जब वह केवल 12 वर्ष की थी।
कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता ने आयु संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जो इस दावे का समर्थन करते थे कि विवाह के समय वह नाबालिग थी।
यह भी दलील दी गई कि जिस व्यक्ति से उसका विवाह हुआ था, उसकी उम्र 21 वर्ष नहीं थी।
हालांकि, प्रतिवादी ने दलील दी कि विवाह बाद में तब हुआ था जब दोनों पक्ष वयस्क हो गए थे।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठासीन अधिकारी वरुण तलवार ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और विवाह को रद्द कर दिया।
भाषा सुरभि देवेंद्र
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