अगरतला, 20 फरवरी (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि जब हिंदी को बढ़ावा दिया जाता है, तो अन्य सभी भाषाएं भी मजबूत होती हैं।
उन्होंने यहां राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह दुष्प्रचार किया जा रहा था कि हिंदी लोगों पर थोपी जा रही है लेकिन पिछले 10 वर्षों में यह बात गलत साबित हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं के बीच कोई विवाद नहीं हो सकता क्योंकि वे एक ही मां की दो बेटियां हैं, जिन्होंने साथ-साथ प्रगति की हैं।’’
शाह ने कहा, ‘‘यह भी दुष्प्रचार किया गया कि यदि हम अपनी भाषाओं को बढ़ावा देंगे, तो हम विकास में पिछड़ जाएंगे, अनुसंधान में पिछड़ जाएंगे और दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएंगे। चाहे जर्मनी हो, जापान हो, दक्षिण कोरिया हो, फ्रांस हो, रूस हो या चीन, इन सभी देशों ने अपनी-अपनी भाषाओं में प्रगति की है। आज ये सभी देश विकास में अग्रणी माने जाते हैं।’’
शाह ने कहा कि लिपि और भाषा विवाद का मुद्दा नहीं हो सकतीं।
उन्होंने कहा, ‘‘त्रिपुरा में एक अलग मांग की गई है। मेरी अपील है कि देवनागरी लिपि को अपनाया जाए क्योंकि पूर्वोत्तर के ज्यादातर लोग इसे अपनी स्थानीय भाषा के रूप में स्वीकार कर चुके हैं। लोग विदेशी लिपि को अपनाकर अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा को कैसे संरक्षित कर सकते हैं?’’
भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी की मांग रही है कि राज्य की आदिवासी आबादी द्वारा बोली जाने वाली कोकबोरोक भाषा के लिए केवल रोमन लिपि का ही प्रयोग किया जाए। अब तक इस भाषा के लिए बांग्ला और रोमन दोनों लिपियों का प्रयोग किया जाता रहा है।
शाह ने कहा, ‘‘देश में अनेक भाषाएं हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी लिपि है, लेकिन कई बोलियां ऐसी भी हैं जिनकी अपनी कोई लिपि नहीं है। इन बोलियों को भी संरक्षित और संग्रहित किया जाना चाहिए। यदि इन बोलियों को संरक्षित करना है, तो इनके लिए एक सामान्य लिपि का निर्माण आवश्यक होगा, और इसी कारण देवनागरी लिपि अपनाने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा कि देवनागरी एक कंप्यूटर-अनुकूल लिपि होने के साथ-साथ सबसे वैज्ञानिक लिपि भी है।
शाह ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि वे घर में अपने बच्चों से उनकी मातृभाषा में बात करें।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप ऐसा नहीं कर सकते, तो आपके बच्चे अपनी मातृभाषा के साहित्य, परंपरा और संस्कृति से वंचित रह जाएंगे। हमें घर में यथासंभव मातृभाषा में बात करनी चाहिए।’’
शाह ने हिंदी को सशक्त बनाने में महात्मा गांधी, वल्लभभाई पटेल, केशव चंद्र सेन, सुभाष चंद्र बोस, बाल गंगाधर तिलक, भीम राव आंबेडकर और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी हस्तियों के योगदान को भी याद किया।
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने सही ही सोचा था कि अगर राजभाषा का विकास नहीं होगा तो देश का विकास नहीं होगा।’’
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर को ‘विवाद’ की भूमि से ‘विकास’ के क्षेत्र में बदल दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 से अब तक प्रतिबंधित समूहों के साथ 21 शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये गए हैं। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगभग 11,000 गुमराह युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज पूर्वोत्तर विकास के पथ पर अग्रसर है। एक समय था जब यहां बंद, नाकेबंदी और गोलीबारी आम बात थी। आज यहां पर्यटन फूल-फल रहा है। यहां निवेश तेजी से बढ़ रहा है।’’
भाषा सुभाष माधव
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