नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राजस्थान को निर्देश दिया है कि वह जयपुर जिले में वस्त्र छपाई उद्योगों द्वारा द्रव्यवती नदी के कथित रूप से प्रदूषण सहित पर्यावरण को होने वाले नुकसान के लिए 100 करोड़ रुपये का अंतरिम मुआवजा दे।
एनजीटी ने उपचारात्मक कार्रवाई की योजना बनाने और उसकी देखरेख के लिए 10-सदस्यीय एक संयुक्त समिति का भी गठन किया और कहा कि मुआवजे की राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाना चाहिए।
एनजीटी उन दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें उद्योगों द्वारा पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया था, जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.के. गोयल की पीठ ने पहले गठित एक समिति की एक रिपोर्ट का उल्लेख किया और कहा कि इसने क्षेत्र की ‘निराशाजनक तस्वीर’ पेश की है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक स्थल दोषपूर्ण है, अधिकांश उद्योग गैर-अनुरूप क्षेत्रों में स्थित थे और औद्योगिक अपशिष्टों को द्रव्यवती नदी और चंदलाई तथा नेवता बांधों में छोड़ा जा रहा था।
इसने कहा कि स्थिति “पूरी तरह से असंतोषजनक” थी और ऐसा प्रतीत होता है कि “क्षेत्र में कोई पर्यावरणीय नियम नहीं था”।
हरित अधिकरण ने कहा, “हम 100 करोड़ रुपये के अंतरिम मुआवजे का आदेश देते हैं, जिसकी वसूली राज्य सरकार उल्लंघन करने वाली इकाइयों और दोषी अधिकारियों से करने के लिए स्वतंत्र है।’’
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