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Tuesday, 31 March, 2026
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राजनीतिक दलों को बैठकर त्रिपुरा के मूल लोगों की समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए: टिपरा मोथा प्रमुख

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अगरतला, 10 मार्च (भाषा) टिपरा मोथा प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने कहा है कि राजनीतिक दलों को एकसाथ बैठकर त्रिपुरा के मूल निवासियों की समस्याओं के ‘‘संवैधानिक समाधान’’ की दिशा में आगे बढ़ने संबंधी उनकी मांगों पर चर्चा करनी चाहिए।

देबबर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के सीधे वित्तपोषण, उसका अपना पुलिस बल और भूमि पर अधिकारों सहित अन्य मुद्दों की मांग उठाएगी।

देबबर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, ‘‘यदि केंद्र, टिपरा मोथा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस और आईपीएफटी सीधे वित्तपोषण पर सहमत हैं, तो इसे शुरू करें। यदि सभी पक्ष भूमि पर अधिकार, पुलिस बल पर सहमत हों, तो उन्हें भी लागू किया जा सकता है। पक्षों के एकसाथ बैठने और मांगों पर चर्चा करने के बाद ही समाधान निकलेगा।’’

त्रिपुरा के पूर्व शाही परिवार के वंशज देबबर्मा अपनी पार्टी के अलग ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ राज्य की मांग के ‘‘संवैधानिक समाधान’’ के लिए लंबे समय से दबाव डाल रहे हैं। टिपरा मोथा ने त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए हाल ही में हुए चुनाव में 13 सीटें जीती हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी उन्हें ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग के लिए जेल नहीं भेज सकता, क्योंकि संविधान ‘‘किसी को भी ऐसी मांग करने की अनुमति देता है।’’

देबबर्मा ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे कहा है कि टिपरा मोथा की मांगों को लेकर बातचीत शुरू करने के लिए एक वार्ताकार होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि टिपरा मोथा को संवैधानिक समाधान को लेकर बातचीत संबंधी कोई आधिकारिक अधिसूचना नहीं मिलती है, तो उसका रुख वैसा ही होगी जैसा आज है। हम आईपीएफटी की वही गलती नहीं कर सकते जब वह 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल हुई थी। 30 फीसदी (14 लाख टिपरालैंड के लोगों) को नजरअंदाज करना ‘सबका साथ सबका विकास’ की दृष्टि के अनुरूप नहीं है।’’

देबबर्मा ने पार्टी के भीतर विभाजन की संभावना को भी खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि पार्टी का कोई भी विधायक टिपरा मोथा नहीं छोड़ेगा, क्योंकि उन्हें राज्य के मूल लोगों के लिए काम करने का जनादेश मिला है।

वहीं भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह त्रिपुरा के छोटे से राज्य के विभाजन को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

भाषा अमित ब्रजेन्द्र

ब्रजेन्द्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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