नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया. उन्होंने क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने के साथ-साथ समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई.
एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा हुए और कई देशों में लोगों की जान गई.
उन्होंने कहा कि भारत बाकी बचे मुद्दों पर होने वाली बातचीत का भी इंतजार कर रहा है, ताकि एक स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचा जा सके.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ का स्वागत करता हूं. इस संघर्ष ने पूरी दुनिया में गंभीर आर्थिक बाधाएं पैदा कीं और कई देशों में लोगों की जान गई है.”
उन्होंने आगे कहा, “भारत को उम्मीद है कि इस समझ के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा समुद्री मार्गों और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी. हम बाकी मुद्दों पर होने वाली चर्चा के जरिए एक स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं.”
रविवार को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता की घोषणा की गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि यह समझौता पश्चिम एशिया में “शांति और सुरक्षा” लाएगा और दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद करेगा.
घोषणा के बाद ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने शांति समझौते की पुष्टि की और आगे की बातचीत के लिए तेहरान की शर्तों की जानकारी दी.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है. दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर दो. तेल का प्रवाह शुरू होने दो.”
ईरान के सरकारी समर्थन वाले प्रेस टीवी के अनुसार, गरीबाबादी ने कहा कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को होगा. इसके बाद समझौता ज्ञापन (MoU) का पाठ सार्वजनिक किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि ईरान 60 दिनों की प्रस्तावित वार्ता अवधि में तभी शामिल होगा, जब वह यह सुनिश्चित कर लेगा कि अमेरिका ने संघर्ष समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने से जुड़े अपने वादे पूरे कर दिए हैं.
यह शांति समझौता शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षरित किया जाएगा.