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Sunday, 7 June, 2026
होमदेशलक्ष्य से पीछे रही PM इंटर्नशिप योजना, लेकिन कई युवाओं को मिली कॉरपोरेट दुनिया में एंट्री

लक्ष्य से पीछे रही PM इंटर्नशिप योजना, लेकिन कई युवाओं को मिली कॉरपोरेट दुनिया में एंट्री

पांच साल में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर देने के उद्देश्य से शुरू की गई PMIS योजना का फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों के गैर-प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से आने वाले उम्मीदवारों पर है.

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नई दिल्ली: जब 23 साल के सुजीत शॉ ने दो साल पहले कलकत्ता विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ कॉमर्स (बी.कॉम) की डिग्री हासिल की, तो वह खुद को उसी स्थिति में पाए जिसमें भारत के कई युवा होते हैं—कागज़ों पर योग्य, लेकिन यह समझ नहीं कि कॉरपोरेट दुनिया में प्रवेश कैसे किया जाए.

शॉ ने याद करते हुए कहा, “आगे क्या करना है और कहां आवेदन करना है, इसे लेकर काफी भ्रम था.”

एक दिन लिंक्डइन देखते समय उन्हें प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) का विज्ञापन दिखाई दिया. यह केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है, जिसे अक्टूबर 2024 में शिक्षा और रोजगार क्षमता के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था.

इस योजना को पांच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर देने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था, लेकिन जैसा कि दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट किया था, पहले दो पायलट चरणों में केवल 16,060 उम्मीदवारों ने वास्तव में कार्यक्रम में शामिल होकर इंटर्नशिप शुरू की.

हालांकि, इस बात से अलग, उद्योग का अनुभव और कार्यस्थल पर सीखने का जो वादा इस योजना ने किया था, उसे शॉ और इंटर्नशिप पूरी करने वाले अन्य युवाओं से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है.

सुजीत शॉ ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में शामिल होने के बाद ITC के खिदिरपुर प्लांट में फाइनेंस इंटर्न के रूप में काम किया. अब वह उसी FMCG कंपनी के साथ कार्यरत हैं | LinkedIn
सुजीत शॉ ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में शामिल होने के बाद ITC के खिदिरपुर प्लांट में फाइनेंस इंटर्न के रूप में काम किया. अब वह उसी FMCG कंपनी के साथ कार्यरत हैं | LinkedIn

शॉ ने अपने घर के पास उपलब्ध इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया और उनका चयन आईटीसी के खिदिरपुर प्लांट, जो एक सिगरेट निर्माण इकाई है, में फाइनेंस इंटर्न के रूप में हुआ. बी.कॉम की डिग्री रखने वाले और कॉरपोरेट अनुभव से पूरी तरह अनजान शॉ के लिए यह अवसर जीवन बदलने वाला साबित हुआ.

शॉ ने कहा, “मैंने अभी-अभी बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की थी और कभी नहीं सोचा था कि मुझे ITC जैसी बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा. इंटर्नशिप के दौरान मुझे टॉप रैंकर्स, CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) और CMA (सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट) के साथ काम करने का अवसर मिला. यह मेरे करियर का टर्निंग प्वाइंट था.”

12 महीनों के दौरान शॉ ने ITC के फाइनेंस विभाग में काम किया. उन्होंने एक निर्धारित मेंटर के मार्गदर्शन में खरीद (प्रोक्योरमेंट), प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कराधान से जुड़े कार्य संभाले. फाइनेंस से जुड़े कामों के अलावा उन्होंने ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) की प्रक्रियाओं में भी सहायता की.

इस अनुभव ने आखिरकार उनके भविष्य की दिशा तय कर दी. नवंबर 2025 में इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ITC ने उन्हें दो फुल-टाइम नौकरी के विकल्प दिए—इंजीनियरिंग और ह्यूमन रिसोर्स (HR) विभाग में.

पहले के अनुभव को देखते हुए उन्होंने HR की भूमिका चुनी और जनवरी से वह प्लांट में पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं.

आज शॉ पेरोल संचालन का प्रबंधन करते हैं और सालाना छह अंकों का वेतन कमाते हैं, जिससे वह अपने पिता की आर्थिक मदद कर पाते हैं. उनके पिता अपने दो बड़े बेटों के साथ मिलकर एक किराना दुकान चलाते हैं.

योजना

पांच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर देने के लिए तैयार की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) का लक्ष्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के गैर-प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से आने वाले युवाओं को भारत की प्रमुख कंपनियों में इंटर्नशिप दिलाना है.

योजना की मूल संरचना के तहत उम्मीदवारों को हर महीने 5,000 रुपये का स्टाइपेंड मिलता था, जिसमें 4,500 रुपये सरकार और 500 रुपये कंपनियां अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) निधि से देती थीं. इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से एकमुश्त 6,000 रुपये की सहायता राशि भी दी जाती थी.

इस योजना का संचालन करने वाले कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने PMIS को ऐसा माध्यम बताया था, जो उम्मीदवारों को वास्तविक कॉरपोरेट माहौल का अनुभव देकर “रोजगार के लिए तैयार और कुशल कार्यबल” तैयार करेगा.

पिछले महीने एक CII कार्यक्रम में MCA की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने इस योजना को “आर्थिक आवश्यकता” और “प्रतिभा निर्माण” दोनों बताया. उन्होंने उद्योग जगत से इसे भविष्य के कार्यबल के विकास में निवेश के रूप में देखने की अपील की.

शांतनु रूज, जो TeamLease EdTech के संस्थापक और सीईओ हैं, उन्होंने कहा कि आज के समय में इंटर्नशिप का महत्व लगातार बढ़ रहा है क्योंकि नियोक्ता अब शिक्षा, कौशल और कार्य अनुभव—तीनों का संयोजन देखते हैं.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “सिर्फ क्लासरूम में पढ़ाई अब पर्याप्त नहीं है, जो छात्र वास्तविक कार्यस्थल पर काम कर चुके होते हैं, वे कार्यस्थल की अपेक्षाओं को बेहतर समझते हैं, सॉफ्ट स्किल्स विकसित करते हैं और बहुत जल्दी उत्पादक बन जाते हैं.” उन्होंने कहा कि मामूली स्टाइपेंड भी युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें जल्दी आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने में मदद करता है.

इंटर्नशिप से रोज़गार तक

कई उम्मीदवारों के लिए यह इंटर्नशिप व्यावहारिक कार्य अनुभव में बदली और कुछ मामलों में, जैसे सुजीत शॉ के साथ हुआ, उन्हें स्थायी नौकरी भी मिली.

रुड़की की अनुश्का सैनी ने बताया कि Wipro के हरिद्वार कार्यालय में 12 महीने की इंटर्नशिप उनके लिए कॉरपोरेट कार्य संस्कृति से पहला परिचय थी.

24 वर्षीय अनुश्का ने दिप्रिंट से कहा, “यह मेरे लिए एक शानदार सफर रहा. मैंने MIS (मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) रिपोर्टिंग, स्टॉक वेरिफिकेशन और विभिन्न सॉफ्टवेयर सिस्टम जैसी नई चीजें सीखीं, जिनके बारे में मुझे पहले जानकारी भी नहीं थी.”

रुड़की की अनुष्का सैनी ने मई में विप्रो के हरिद्वार कार्यालय में अपनी 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी की | LinkedIn
रुड़की की अनुष्का सैनी ने मई में विप्रो के हरिद्वार कार्यालय में अपनी 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी की | LinkedIn

मई में इंटर्नशिप पूरी करने के बाद अनुश्का अब अपने गृह नगर के आसपास रोजगार के अवसर तलाश रही हैं. वह भविष्य की नौकरियों को लेकर विप्रो की HR टीम और प्लांट नेतृत्व के संपर्क में बनी हुई हैं.

ऐसा ही अनुभव कनिका शर्मा का भी रहा, जिन्हें GAIL India Limited के दिल्ली कार्यालय में इंटर्नशिप पूरी करने के बाद स्थायी नौकरी मिली.

दिल्ली की रहने वाली कनिका, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एम.कॉम कर रही थीं. इस दौरान उन्होंने GAIL के फाइनेंस विभाग में इंटर्नशिप की और SAP FICO (फाइनेंशियल अकाउंटिंग एंड कंट्रोलिंग) तथा SAP TRM (ट्रेजरी एंड रिस्क मैनेजमेंट) जैसे सॉफ्टवेयर पर काम किया.

दिल्ली की कनिका शर्मा ने राष्ट्रीय राजधानी में GAIL इंडिया के कार्यालय में इंटर्नशिप की. अब वह Aprazer Healthcare Pvt Ltd में जूनियर अकाउंटेंट के रूप में काम कर रही हैं | LinkedIn
दिल्ली की कनिका शर्मा ने राष्ट्रीय राजधानी में GAIL इंडिया के कार्यालय में इंटर्नशिप की. अब वह Aprazer Healthcare Pvt Ltd में जूनियर अकाउंटेंट के रूप में काम कर रही हैं | LinkedIn

उन्होंने कहा, “कोचिंग संस्थान इन सॉफ्टवेयर सिस्टम्स को सिखाने के लिए लगभग 25,000 रुपये लेते हैं. GAIL में मैंने इन्हें मुफ्त में सीखा और इंटर्नशिप के दौरान मुझे भुगतान भी मिला.”

अब Aprazer Healthcare Pvt Ltd में जूनियर अकाउंटेंट के रूप में काम कर रहीं 25-वर्षीय कनिका ने कहा कि इंटर्नशिप के अनुभव ने उन्हें स्थायी नौकरी पाने में मदद की.

उन्होंने कहा, “इंटरव्यू के दौरान मुझसे GAIL इंडिया में किए गए प्रोजेक्ट्स और सीखे गए सॉफ्टवेयर के बारे में पूछा गया. इससे मुझे इंटरव्यू क्लियर करने में मदद मिली.”

इसी तरह उत्तर प्रदेश के हाथरस की प्रतिमा कौशिक ने भी इस योजना से मिले व्यावहारिक औद्योगिक अनुभव की सराहना की, जो उनके अनुसार अन्यथा हासिल करना मुश्किल था. उनकी इंटर्नशिप दिसंबर 2025 में पूरी हुई.

MG Polytechnic से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाली प्रतिमा ने कई इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था. बाद में उनका चयन राजस्थान में अदानी अंबुजा सीमेंट के रबरियावास प्लांट में हुआ, जहां उन्होंने Alternative Fuels and Raw Material (AFR) परियोजनाओं पर काम किया और प्रोजेक्ट निष्पादन, साइट सुपरविजन तथा औद्योगिक सुरक्षा प्रक्रियाओं का अनुभव प्राप्त किया.

उन्होंने कहा, “इंटर्नशिप के दौरान मुझे सिविल और औद्योगिक परियोजनाओं के विभिन्न पहलुओं का मूल्यवान व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक अनुभव मिला.”

22-वर्षीय प्रतिमा को बाद में राजस्थान के नागौर जिले में अडाणी फाउंडेशन में पूर्णकालिक नौकरी मिल गई, जहां वह ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं का प्रबंधन करती हैं.

चार बहनों वाले परिवार से आने वाली प्रतिमा ने बताया कि उनके पिता स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस नौकरी ने उन्हें पेशेवर विकास के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता भी दी है.

प्रतिमा ने कहा, “मुझे मिले अवसरों के लिए मैं आभारी हूं. इनकी मदद से मैं पेशेवर रूप से आगे बढ़ सकी और मजबूत तकनीकी व संचार कौशल विकसित कर सकी.”

टीमलीज़ एडटेक के संस्थापक रूज का कहना है कि सरकार समर्थित PMIS छात्रों को ऐसे अवसरों तक पहुंच दिला सकता है, जो अन्यथा उनकी पहुंच से बाहर रह जाते, खासकर छोटे शहरों और कम सुविधाओं वाले परिवारों से आने वाले युवाओं के लिए.

PMIS में बदलाव

इन सकारात्मक अनुभवों के बावजूद, संसद में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, PMIS के पहले दो पायलट चरणों में भागीदारी उम्मीदों से कम रही.

पहले पायलट चरण में कंपनियों ने 60,000 से अधिक उम्मीदवारों को 82,000 से ज्यादा इंटर्नशिप ऑफर दिए. इनमें से केवल 8,760 उम्मीदवारों ने कार्यक्रम जॉइन किया और लगभग 54 प्रतिशत बीच में ही बाहर हो गए. मार्च 2026 तक पहले चरण में सिर्फ 3,605 उम्मीदवारों ने पूरी 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी की.

अप्रैल 2025 में शुरू हुए दूसरे चरण में भी लगभग यही स्थिति रही. 71,000 से अधिक उम्मीदवारों को 83,000 से ज्यादा ऑफर दिए गए, लेकिन केवल 7,300 ने कार्यक्रम जॉइन किया. मार्च 2026 तक दोनों चरणों में कुल 7,292 उम्मीदवार बीच में ही कार्यक्रम छोड़ चुके थे.

जैसा कि दिप्रिंट ने फरवरी में रिपोर्ट किया था, सरकार ने इसका कारण स्थानांतरण (रिलोकेशन) की परेशानी, कम स्टाइपेंड और 12 महीने की लंबी अवधि जैसी चुनौतियों को बताया था.

रूज का मानना है कि अपेक्षाकृत कम प्रतिक्रिया का कारण छात्रों की अपेक्षाओं और इंटर्नशिप की वास्तविकता के बीच का अंतर भी था.

उन्होंने कहा, “कई उम्मीदवारों को यह स्पष्ट नहीं था कि इंटर्नशिप उनके शैक्षणिक विषयों से मेल खाती है या नहीं. वहीं कुछ लोगों को अपने गृह नगर से दूर अवसर मिलने के कारण स्थानांतरण की समस्या का सामना करना पड़ा.”

कम प्रतिक्रिया मिलने के बाद सरकार ने भागीदारी और उम्मीदवारों को बनाए रखने के लिए मार्च में योजना के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में बदलाव किया. प्रस्तावित बदलावों की खबर सबसे पहले दिप्रिंट ने दी थी.

मासिक स्टाइपेंड 5,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दिया गया. अब इसमें 8,100 रुपये सरकार और 900 रुपये नियोक्ता देंगे.

पात्रता आयु सीमा को 21-24 वर्ष से बढ़ाकर 18-25 वर्ष कर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक उम्मीदवार आवेदन कर सकें.

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इंटर्नशिप की अवधि में किया गया. अब इसे नियोक्ताओं की जरूरत के अनुसार 6 से 9 महीने के बीच कर दिया गया है. इसका उद्देश्य उम्मीदवारों की लंबी अवधि की प्रतिबद्धता और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चिंताओं को दूर करना था.

संशोधित ढांचे के साथ आवेदन का तीसरा चरण अप्रैल में शुरू हुआ और MCA के एक अधिकारी के अनुसार इस वर्ष शुरुआती प्रतिक्रिया पहले से बेहतर रही है.

हालांकि, यह योजना अभी भी उस बड़े स्तर तक नहीं पहुंची है जिसकी कल्पना नीति निर्माताओं ने की थी, लेकिन सफल उम्मीदवारों के अनुभव बताते हैं कि कम से कम कुछ युवाओं के लिए PMIS ने वही काम किया है जिसके लिए इसे बनाया गया था—ऐसी पेशेवर दुनिया में प्रवेश का अवसर देना, जो पहले उनकी पहुंच से बाहर लगती थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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